समालखा (पानीपत)। ग्लोबल ट्रैवल (जीटी) कंपनी लोगों के रुपये लेकर भाग गई है। पुलिस को अभी इसकी शिकायत नहीं मिली है। शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि कंपनी में समालखा समेत देश के कई राज्यों से निवेश कराया गया है। मनाना गांव के रमेश, ईश्वर और कमला ने बताया कि समालखा खंड में कंपनी के साथ काफी लोग जुड़े थे। जिन्होंने जल्द पैसा कमाने के चक्कर में लोगों की चेन बनाई थी। इनमें कई गणमान्य लोग भी शामिल हैं जो कि सामने नहीं आ रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है कंपनी ने कुछ महीने पहले समालखा में काम शुरू किया था। लोगों को इसमें टास्क के माध्यम से प्रतिदिन मुनाफा देने की बात कही थी। टास्क में प्रतिदिन कुछ होटलों को फाइव स्टार रेटिंग दी जाती थी। इसके साथ मेडिकल व ट्रैवल के अलग से पैसे मिलते थे। एक आईडी कम से कम 1800 रुपये से शुरू होती थी। एक विशेष रकम देकर कंपनी से जुड़ते थे। प्रतिदिन के टास्क को पूरा करने पर एक ही महीने में दिए गए पैसे दोगुना कर देने की बात कही जाती थी। महीने भर में पैसा दोगुना मिलने पर लोग बिना जांच के जुड़ते चले गए।
16800 रुपये के टास्क में लगा था ज्यादा पैसा
लोगों ने सबसे ज्यादा पैसा 16800 रुपये के टास्क में लगाया था। इसमें प्रतिदिन 608 रुपये मिलते थे और मेडिकल व ट्रैवल का मिलाकर यह करीब 703 रुपये होते थे। अलग-अलग गु्रप के लिए पैसों की निकासी के अलग-अलग दिन निर्धारित किए गए थे। शहर की अपेक्षा गांवों के युवाओं को निशाना बनाया गया था। इसमें गांवों के लोगों ने ज्यादा निवेश किया था। पावटी व डिकाडला गांवों से सबसे ज्यादा पैसा लगाया गया है। इसमें अपने नीचे 10 लोगों को जोड़ने वाले व्यक्ति को प्रत्येक सदस्य के जोड़ने पर पैसे तो मिलते थे। साथ ही उन्हें सुपर व्हील व सुपर ट्रॉफी के माध्यम से लालच देकर फंसाया गया। जिसमें उन्हें हर सदस्य के जोड़ने पर अलग से इनाम की राशि दी जाती थी। अपने नीचे 10 सदस्यों को सीधे जोड़ने पर कंपनी द्वारा आठ हजार रुपये की मासिक स्थायी आय देने का भी वायदा किया गया था। जिससे भी लोगों ने अपने व परिवार के सदस्यों की आईडी बनाई और कंपनी के गोलमाल में फंस गए।
लोगों को झांसे में लेने के लिए कंपनी ने हर सदस्य को अपने नीचे नई आईडी लगाने पर मोटी रकम देने की बात कही। व्हाट्सएप ग्रुप में लगातार मैसेज किए गए और पावटी गांव के एक व्यक्ति की कार व दर्जनों लोगों के सोने के सिक्के निकाले गए। विश्वास जमाने के लिए मोबाइल व एलईडी निकाली। कार व सोने के सिक्के कभी किसी को नहीं मिले। गांवों में उक्त योजना के साथ लोग जुड़ गए थे। एक व्यक्ति ने अपने नीचे 100 से अधिक लोगों को जोड़ा था। वहीं समालखा में कंपनी ने एक कार्यालय दिखाया था। जिस पर फ्लैक्स लगाया है। कंपनी कार्यालय शुरू करने से पहले ही भाग गई।
लिजा व बॉस करते थे संचालन
निवेशकों के अनुसार, सदस्यों ने समस्याओं व राशि को लेकर एक गु्रप भी बनाया था। इसमें लिजा व बॉस नाम से 2 नंबर भी बतौर गु्रप एडमिन जुड़े थे। ये दोनों सदस्यों के सवालों का जवाब देते थे। यहां तक कि सदस्यों को धमका भी दिया जाता था और उन्हें गु्रप से हटाने की बात कह दी जाती थी। वे पहले ही ग्रुप से हट गए। ग्रुप आज भी चल रहा है। एक व्यक्ति ने बताया कि मंडपम दिल्ली में 17 नवंबर को बैठक करने की बात कही जा रही थी। कंपनी झुग्गी झोपड़ियों में स्वास्थ्य जांच शिविर, आर्थिक सहयोग, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी चलाती थी। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि कंपनी शुरूआत में एक निश्चित राशि सिक्योरिटी लेती थी। दिवाली के बाद विड्रा बंद कर दिया था। इसके कारण लोगों में संदेह बढ़ गया और गु्रप में मैसेज की बाढ़ आई। वार्षिक शुल्क 4850 रुपये देने के बाद विड्रा करने की शर्त रखी। कुछ लोगों ने वार्षिक शुल्क भी जमा करा दिया। उनको करीब 980 रुपये ही वापस मिल पाए।
एक कंपनी की ओर से लाेगों को ठगने का मामला जानकारी में आया है। पुलिस के पास फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं है। इसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय