पानीपत। जंगली जानवर की टक्कर से नई कार क्षतिग्रस्त होने पर बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। कंपनी ने कहा कि कार का वैध परमिट प्रस्तुत नहीं किया, वहीं, कार के मालिक ने कहा कि कार को खरीदे मात्र 22 दिन हुए थे। जिस कारण परमिट मिलने की प्रक्रिया लंबित थी। आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया और कंपनी को खर्च हुए 1.65 लाख रुपये का क्लेम छह प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए।
सोनीपत के जगदीप ने पानीपत जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उन्होंने दो फरवरी 2023 को एक नई कार खरीदी थी। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कार का बीमा कराया था। 25 फरवरी 2023 को वह अपने दोस्त के साथ कार से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जा रहे थे, जैसे ही वह चंपावत पहुंचे तो उनकी कार के सामने एक जंगली जानवर आ गया, जिसकी टक्कर से कार क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन किसी को चोट नहीं आई। जिस कारण उन्होंने संबंधित थाने में इसकी सूचना नहीं दी, इसके बाद उन्होंने 26 हजार रुपये क्रेन मालिक को देकर कार को पानीपत के जीटी रोड स्थित शोरूम पहुंचाया। कार को ठीक करने में करीब 1.65 लाख रुपये का खर्च हुआ। उन्होंने बीमा कंपनी को सूचना दी और सभी जरूरी दस्तावेज सर्वेयर को सौंप दिए। इसके बाद पांच जुलाई को कंपनी ने क्लेम का दावा खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि दुर्घटना के समय वाहन का वैध परमिट प्रस्तुत नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना था कि वाहन दो फरवरी 2023 को नया खरीदा गया था और परमिट जारी करने की प्रक्रिया संबंधित प्राधिकरण के समक्ष लंबित थी। बाद में वैध परमिट की प्रति भी प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन कंपनी ने फिर भी क्लेम नहीं दिया।
मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन डॉ. आर के डोगरा ने माना कि बीमा कंपनी का तकनीकी आधार पर दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी है। आयोग ने बीमा कंपनी को 1,65,779 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित उपभोक्ता को भुगतान करने के आदेश दिए, इसके अलावा पांच हजार रुपये मानसिक पीड़ा और 5,500 रुपये मुकदमे खर्च के लिए देने के आदेश दिए।