प्राचीन देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु, सप्तमी-अष्टमी पर पूरे दिन खुले रहते हैं कपाट
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। शहर के बीचों-बीच स्थित प्राचीन देवी मंदिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक मान्यताओं का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल का संबंध महाभारत काल से है और अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां माता भगवती की आराधना की थी। करीब 250 से 300 वर्ष पुराने इस मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
नौ ग्रहों और नौ देवियों की स्थापना खासियत
मंदिर की प्रमुख विशेषता गर्भगृह के आसपास नौ ग्रहों और नौ देवियों के विभिन्न स्वरूपों की मूर्तियों की स्थापना है। श्रद्धालु यहां माता रानी के दर्शन के साथ नवग्रहों की पूजा-अर्चना भी करते हैं। दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर मंदिर पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पानीपत की तीसरी लड़ाई के दौरान मराठों ने भी यहां विशेष पूजा-अर्चना की थी।
मंदिर के प्रधान काकू बंसल ने बताया कि प्राचीन देवी मंदिर शहर की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है। मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखने के साथ इसके विकास और सौंदर्यीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्य पुजारी आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि मंदिर में नियमित रूप से अनुष्ठान, हवन और पूजन होते हैं। नवरात्र और अन्य विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। नवरात्र में प्रतिदिन 25 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सप्तमी और अष्टमी पर मंदिर के कपाट पूरे दिन खुले रहते हैं।
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