-डॉ. राजेश मुनि जी ने कहा- कर्मठ और संयम शिरोमणि थे तपस्वी , 72 दिनों का संथारा बना उज्ज्वल कीर्तिमान
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में श्री एसएस जैन सभा (रजि.) के तत्वावधान में तपस्वी बद्री प्रसाद महाराज का 40वां संथारा संपूर्ति दिवस शुक्रवार को मनाया गया। महा अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि महाराज, सेवाभावी राजेंद्र मुनि महाराज, महासाध्वी समता महाराज और तपस्विनी साध्वी भविका महाराज (ठाणे-4) का पावन सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
डॉ. राजेश मुनि महाराज ने कहा कि तपस्वी महाराज एक कर्मठ और संयम शिरोमणि महामुनि थे। 81 वर्ष की आयु में उनका 72 दिनों का उत्कृष्ट संथारा अध्यात्म जगत में एक उज्ज्वल कीर्तिमान है। मुनि ने अपने गुरु तपस्वी कान मुनि महाराज और तपस्वी बद्री प्रसाद महाराज के जीवन में गजब की समानताएं बताईं। उन्होंने बताया कि दोनों महापुरुषों की दीक्षा एक जनवरी 1945 को हुई थी और दोनों के पूरे परिवार ने संयम पथ अपनाया था। दोनों ही महामुनि जीवनभर फोटो खिंचवाने से दूर रहे और उनके देवलोक गमन के बाद ही तस्वीरें सामने आईं।
तपस्वी ने पांच अगस्त 1987 को सोनीपत में संथारा ग्रहण किया था। वे 72 दिन बाद 16 अक्तूबर 1987 को पूर्ण (सीझ) हुआ। मुनि ने गांधी मंडी महिला स्थानक में महासाध्वी कुसुम प्रभा महाराज के 21 दिनों के संथारे और हाल ही में तपस्विनी अंगूरी देवी के सफल संथारे का भी उल्लेख किया।