पानीपत। चिट्ठी बम के बाद भी निगम आयुक्त और उनके अधिकारी विकास कार्यों में गोलमोल के आरोपों पर नहीं जाग पाए हैं। उपायुक्त को जवाब देने का समय शनिवार को पूरा होने के बाद सोमवार को भी निगम अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। ऐसे में शहर में कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। निगम अधिकारी इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।
नगर निगम अधिकारियों ने करोड़ों रुपये के टेंडरों की नियम व शर्ताें में गोलमाल कर पिछले दिनों दो फर्माें को टेंडर दिए थे। कुछ ठेकेदारों ने एकजुट होकर विरोध किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। यह मामला ठंडा पड़ गया और अधिकारियों ने दोनों फर्म को वर्क ऑर्डर भी कर दिए। इसके बाद काम शुरू कर दिया। पिछले दिनों उपायुक्त को एक गुमनाम चिट्ठी मिली। यह चिट्ठी उपायुक्त समेत सीएम, निकाय मंत्री और विजिलेंस को भी भेजी गई थी। डीसी ने चिट्ठी के आधार पर निगम आयुक्त से जवाब मांगा था। निगम आयुक्त को सात दिन में जवाब देना था। यह समय अवधि शनिवार को पूरी हो गई। दो दिन के अवकाश के बाद सोमवार को कार्यालय खुले। लोगों को पूरा दिन निगम के जवाब का इंतजार रहा, लेकिन शाम तक कोई जवाब नहीं दिया गया।
शिकायत में निगम अधिकारियों पर आरोप थे कि उन्होंने 25 से 30 प्रतिशत घाटे में काम करने और नियमों पर खरा उतरने वाली एजेंसिंयों को दरकिनार कर दिया और दो फर्मों को फर्जी दस्तावेज आधारित टेंडर दे दिया। आरोप है कि दोनों फर्मों को निर्धारित रेट से अधिक में टेंडर दिया गया है। इस पूरे खेल में निगम के दो अधिकारी इंजीनियरिंग और एक अधिकारी लेखा विभाग का शामिल होने का आरोप है।
दूसरी ओर वार्ड-12 के पार्षद सतीश सैनी ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की है। इसमें पार्षद ने लिखा है कि दो चार अधिकारियों का कमाल, पानीपत नगर निगम भ्रष्टाचार में पूरे हरियाणा में कर रहा नंबर एक पर धमाल। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जवाब नहीं दिया है। ये मामले में अधिक जानकारी आयुक्त दे सकते हैं।