समालखा। हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढती एसोसिएशन के बैनर तले समालखा के आढ़तियों ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए हड़ताल शुरू कर दी है जो पांच अप्रैल तक जारी रहेगी। समालखा नई अनाज मंडी में सोमवार को आढती एसोसिएशन के प्रधान बलजीत सिंह रूहल ने कहा प्रदेश सरकार आढ़तियों को खत्म करना चाहती है। इसलिए आढ़तियों को दरकिनार कर सरसों सहित कई फसलों की सीधी खरीद कर रही है। सरसों, पीआर जीरी व सूरजमुखी जैसी फसलों पर आढ़तियों को मात्र 46 रुपये कमीशन दिया जा रहा है जबकि आढ़त पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए। जोकि गेहूं पर 53.125 व धान पर 55.075 रुपये बनती है। जबकि पिछले चार वर्षों से सरकार द्वारा गेहूं पर 46 रुपये और धान पर 45.88 रुपये फिक्स आढ़त दी जा रही है जो की बहुत कम है।
मंडी प्रधान बलजीत सिंह ने कहा कि किसानों की सभी फसलें जैसे कॉटन, सरसों, सूरजमुखी,बाजरा इत्यादि सभी फसलें सरकार द्वारा एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में जीएसटी फर्स्ट सेल पर है जबकि पंजाब में जीएसटी फर्स्ट परचेज पर लागू है। इसलिए पंजाब के कच्चे आढ़तीयों को जीएसटी नंबर लेने की जरूरत नहीं है। वहां खरीदार ही जीएसटी भरता है। जबकि हरियाणा में इसके उलट कच्चा आढ़ती जीएसटी भर रहा है। उनका जीएसटी निवेदन से निवेदन है कि पंजाब की तर्ज पर हरियाणा के आढ़तियों के लिए भी जीएसटी जरूरी नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही मार्केट फीस भरने का समय कम से कम 10 दिन किया जाए। जो अभी सात दिन का समय मिलता है।
आढती एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि फिलहाल यह हड़ताल सांकेतिक है। अगर सरकार फिर भी हमारी मांगे नहीं मानती तो चुनाव की तिथि से 10 दिन पहले पूरे हरियाणा में सरकार का जोर-शोर से खुला विरोध किया जाएगा। आढती एसोसिएशन प्रधान बलजीत सिंह रूहल ने मार्केट कमेटी द्वारा मंडी में बनाए गए नये शैड पर टूटी हुई चादरें डालने से रोष जताया ओर मांग की है कि गेहूं का सीजन शुरू हो गया है। बरसात में किसानों का गेहूं को भीगने से बचाने के लिए शैड की टूटी चदरों को तुरंत बदला जाए।