पानीपत। सरकारी डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्तिकालीन हड़ताल का एलान कर दिया है। इससे मरीजों की मुसीबत अधिक बढ़ गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने से मरीज बेहाल नजर आए। इन सबके चलते इमरजेंसी, पोस्टमार्टम , डिलीवरी , एक्सरे, अल्ट्रसाउंड व ओपीडी पूरी तरह से बंद रही। अस्पताल में आए लगभग 1500 मरीज इलाज के लिए भटकते रहे और बिना इलाज कराए एक हजार से ज्यादा मरीजों को लौटना पड़ा। अस्पताल की सुरक्षा के लिए सिटी थाना पुलिस को तैनात किया गया था। शुक्रवार को ओपीडी की स्लिप तक नहीं बनी। एक भी मरीज की ओपीडी नहीं की गई।
डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि वह इस बार वे पीछे नहीं हटेंगे। सरकार द्वारा उनकी मांगों पर नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद ही वह काम पर लौटेंगे। दूसरी और सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल को एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल ने मजबूती प्रदान कर दी है। जिले में एनएचएम के 350 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इनमें 12 डॉक्टर, 33 स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक, क्लर्क, डाटा एंटी ऑपरेशन समेत स्वास्थ्य विभाग के कई प्रोजेक्ट के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। एनएचएम कर्मचारियों ने शुक्रवार को जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर धरना देकर रोष प्रदर्शन किया। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने दो बजे तक इमरजेंसी में 30 मरीजों की जांच की। पांच एमएलआर काटी। इमरजेंसी वार्ड में दाखिल मरीजों की हालत धीरे धीरे खराब हो रही है। उनकी हालत गंभीर हो रही है। यहां एक टीबी, एक दमा व एक लीवर की बीमारी से ग्रस्त मरीज दाखिल है।
मरीजों को राहत देने के लिए सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने एनसी मेडिकल कॉलेज से 20 डॉक्टरों की टीम को बुलाया था। जब इसका हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन को पता चला तो उन्होंने एनसी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को कॉल कर साफ तौर पर सरकारी अस्पताल में आने से इंकार कर दिया। इसके बाद एनसी प्रबंधन ने सिविल सर्जन से माफी मांग ली। सिविल सर्जन इन चुनौतियों के बीच शुक्रवार को भी इमरजेंसी वार्ड में अकेले डटे रहे। शुक्रवार को इमरजेंसी वार्ड में 35 लोग लड़ाई झगड़ों, सड़क हादसों में घायल होकर आए। इनको यहां प्राथमिक उपचार तो मिला लेकिन इनकी एमएलआर नहीं कटी। शाम को इमरजेंसी वार्ड में एक रिटायर्ड डॉक्टर को मरीजों की जांच के बुलाया गया लेकिन वह एमएलआर व एमएलसी नहीं काट सकते थे। उन्होंने यहां सिर्फ मरीजों को प्राथमिक उपचार ही दिया और उन्हें शांत किया।
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सिविल सर्जन बोले डॉक्टरों को धमकाया गया
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए एनसी मेडिकल कॉलेज से एमओयू साइन किया था । यहां 20 डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया था लेकिन एचसीएमएस ने उन्हें धमकाया और यहां से भगा दिया। इसलिए परेशानी अधिक खड़ी हुई हैं।
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सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है- मलिक
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा कि वह कई कई साल से एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। कोरोना काल में कई कर्मचारियों ने काम करते हुए अपनी जान तक गवां दी थी। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए। सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है अब वह चार दिन की हड़ताल पर रहेंगे। सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है।
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मांगे नहीं माने जाने तक नहीं लौटेंगे- डॉ. रिंकू
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रिंकू सांगवान ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को नहीं मान रही है। मरीजों को हो रही परेशानी की जिम्मेदार सरकार है। सरकार उनका शोषण कर रही है। वह सरकार को बार बार अल्टीमेटम दे रहे थे। सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी। वह काम पर नहीं लौटेंगे।