इसराना। सेना की छह इंजीनियरिंग रेजिमेंट में तैनात सूबेदार सुनील कुमार मलिक काे बुधवार को पैतृक गांव बुलाना लाखू में राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि दी। वे पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात थे और दिल का दौरा पड़ना मौत का कारण बताया है। राजकीय सम्मान में प्रशासन, पुलिस के साथ सेना के अधिकारी व जवान तैनात रहे। गांव में सभी की पलकें भीगी हुईं थीं।
सेना के जवान सूबेदार सुनील कुमार मलिक (38) का शव बुधवार सुबह उनके पैतृक गांव बुआना लाखू में लेकर पहुंचे। गांव के युवा और अन्य लोग शाहपुर चौक से मोटरसाइकिल के काफिले में भारत माता और सूबेदार सुनील कुमार मलिक जयकारे लगाते हुए गांव पहुंचे। गांव की श्मशान भूमि में सैनिक सम्मान के साथ सूबेदार सुनील कुमार मलिक को अंतिम विदाई दी।
जिसमें प्रशासन की तरफ से एसडीएम इसराना आशीष कुमार और सेना की एएडी 47 अंबाला से लेफ्टिनेंट सत्यम कुमार सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया। जिला सैनिक बोर्ड से अधिकारी राजबीर सिंह, राजकुमार, डीएसपी राजबीर सिंह, पूर्व जिला पार्षद रंजीता कौशिक के अलावा पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के सदस्य शामिल रहे।
पिता और भाई भी सेना में थे
सूबेदार सुनील कुमार मलिक के पिता जगदीश मलिक और बड़े भाई रूपन मलिक भी सेना में कार्यरत थे। इनके दो चेचरे भाई भी सेना में सेवाएं दे रहे हैं। उनके पिता पहले सेवानिवृत हो चुके थे। उनका कोरोना के दौरान निधन हो गया था। रूपन मलिक सेना में ड्यूटी के दौरान घायल हो गए थे। उनके दोनों पैर पैरालाइसिस हो गए थे। वे सेवानिवृति ले आए थे। सुनील कुमार मलिक 2010 में खेल कोटे से सेना में भर्ती हुए थे। बॉक्सिंग और वॉलीबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे। वे अपने पीछे मां, पत्नी पिंकी व दो बेटों नीशु और वंश को छोड़ गए।