पानीपत। इस बार की तरह अगले तीन सालों तक प्राइवेट एजेंसी शुगर मिल को चलाएगी। इसका ठेका देने के लिए मिल प्रबंधन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इस पर करीब 20 करोड़ तक खर्च आने का अनुमान है। इस काम में शुगर मिल के संचालन से लेकर इसकी मशीनों की रिपेयर मेंटनेंस भी शामिल रहेगी। हालांकि इस वर्ष भी मिल को चलाने में करीब चार से पांच करोड़ रुपये का खर्च आ चुका है। जिसमें ऑफ सीजन के महीनों में मिल की रिपेयरिंग मेंटनेंस के लिए मिल एजेंसी को करीब 82 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान करता है। वहीं सीजन में इसके लिए करीब 70 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है।
मिल प्रबंधन का मानना है कि तीनों सालों तक मिल को चलाने और इसकी मरम्मत आदि का खर्च मिल महज एक साल की बिजली बेचकर पूरा कर सकता है। पिछले साल मिल ने करीब 20 करोड़ की बिजली निगम को बेची थी। इस बार ये लक्ष्य बढ़ाकर 25 से 30 करोड़ का किया गया है। यानी एक साल की बिजली खर्च के बदले तीन साल तक मिल को चलाया जा सकेगा।
प्रबंधन का मानना है कि मिल में फिलहाल पक्के कर्मचारियों से लेकर डेली वेजेज के कर्मचारी सालों पुराने कार्यरत हैं। इनमें से करीब 80 से 90 प्रतिशत कर्मचारी आगामी दो साल में रिटायर हो जाएंगे। दूसरी ओर मिल अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इसके संचालन से लेकर रिपेयरिंग तक के लिए नई तकनीकी जानकारी वाले इंजीनियर और कर्मचारियों की ज्यादा आवश्यकता होती है। ऑफ सीजन में मिल की रिपयेरिंग से लेकर संचालन में भी करोड़ों खर्च होते हैं। एजेंसी को ठेका देने के बाद पूरी जिम्मेदारी एजेंसी की होगी।
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अब तक ये हुआ काम
इस सीजन में शुगर मिल अब तक करीब 44 लाख गन्ने की पेराई कर चुका है। जिससे 380800 क्विंटल चीनी का उत्पादन भी हो चुका है। जिसका रिकवरी रेट 9.04 प्रतिशत रहा है। अब तक मिल की टरबाइन 2.9 करोड़ से ज्यादा बिजली यूनिट को बिजली निगम को भेज चुकी है।
वर्जन:
शुगर मिल को चलाने और इसकी मरम्मत आदि के काम के लिए इसे आगामी तीन साल तक ठेके पर एजेंसी को देने की तैयारी की जा रही है। इसमें जो भी एजेंसी कम से कम रेट पर मिल में काम करेगी, उसे काम दिया जाएगा। अबकी बार मिल करीब 25 से 30 करोड़ की बिजली उत्पादन करेगा।
जगदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल।