पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में वसंत उत्सव पर दो दिवसीय वसंत आयो रे उत्सव के दूसरे दिन कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पतंग उडाना, पतंग बनाना एवं सजाना, पीली वेशभूषा में नृत्य, काव्य पाठ और गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सुंदर पतंगें बनाईं। ये कार्यक्रम महिला प्रकोष्ठ, आईक्यूएसी, सोशल साइंस एसोसिएशन, एनएसएस और पर्यावरण बचाओ सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। पतंग बनाने और उड़ाने में छात्र-छात्राओं के साथ प्राध्यापकों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया ।
डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। वसंत पंचमी का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं। वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं । डॉ. मोनिका खुराना ने कहा कि राजा भोज का जन्मदिवस भी वसंत पंचमी को ही आता हैं। राजा भोज इस दिन पर एक बड़ा उत्सव करवाते थे जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीति भोज रखा जाता था जो चालीस दिन तक चलता था। वसंत पंचमी हिंदी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्मदिवस भी है। निराला के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी। वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दान करते थे। इसलिए लोग उन्हें महाप्राण कहते थे। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, प्रो. अन्नू आहूजा, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. मोनिका खुराना, प्रो. तन्नु मेहता, प्रो. निधि ने सक्रियता के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रथम विजेता को पांच सौ रुपये, द्वितीय को तीन सौ रुपये और तृतीय को दो सौ रुपये का इनाम देकर सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिताओं के परिणाम-
पतंग बनाना और सजाना
प्रथम सिम्पी बीबीए- तृतीय
द्वितीय मोहित बीए- द्वितीय
तृतीय मधु बीए- प्रथम
सांत्वना पिंकी बीए-तृतीय
सर्वश्रेष्ठ पीली वेशभूषा-
प्रथम स्नेहा एमए- इकोनॉमिक्स
गायन प्रतियोगिता
प्रथम राज बीए- प्रथम
द्वितीय श्रधा बीए- अंग्रेजी (ऑनर्स)
तृतीय मोनिया बीए- तृतीय