माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। टेलर के पड़ोसी पर कैंची से हमला करने के मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 12वीं कक्षा के छात्र को तीन माह तक जिला नागरिक अस्पताल में सामाजिक सेवा करने की सजा सुनाई है। बोर्ड ने छात्र की पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए यह सुधारात्मक फैसला लिया है। बोर्ड ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि किशोर में सुधार लाकर उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार की पीठ ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आदेश जारी किया। बोर्ड ने कहा कि अस्पताल में बीमार, असहाय और घायल मरीजों की सेवा करने से किशोर को चोट के दर्द का अहसास होगा। इससे उसमें दया, सेवा भावना और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। साथ ही उसकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
यह है पूरा मामला
मामला 19 अक्तूबर 2024 का है। थाना शहर में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप के अनुसार, स्थानीय बाजार में एक टेलर की दुकान पर दो लड़कों के बीच कहासुनी हो गई थी। इस दौरान बीच-बचाव करने आए पड़ोसी पर कैंची से हमला कर दिया गया। हमले में उसकी आंख के नीचे गंभीर चोट आई थी। वारदात के बाद आरोपी मौके से भाग गए थे।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। जांच के दौरान एक आरोपी के नाबालिग होने पर मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अस्पताल में सेवा से जागेगी संवेदना
प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा ने आदेश में कहा कि जिला नागरिक अस्पताल में बीमार, असहाय और घायल मरीजों की सेवा करने से किशोर के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आएगा। इससे उसे समझ आएगा कि किसी को चोट पहुंचाने से उसे कितना दर्द सहना पड़ता है। अस्पताल में सेवा करने से उसमें संवेदना और सामाजिक दायित्व का भाव विकसित होगा।
बोर्ड ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तीन माह की सामुदायिक सेवा के दौरान किशोर की उपस्थिति और गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि किशोर ने सामुदायिक सेवा की शर्तों का पालन नहीं किया या निर्देशों की अवहेलना की तो उसके खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है।