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कैसे बचे जान, लावारिस पशु लगा देते जाम

Mon, 05 Sep 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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समस्‍या - फोटो : पानीपत
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पानीपत। शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशु हादसों का सबब बने हुए हैं। शहर के मुख्य मार्गों, बाजारों के अलावा अंदर की गलियों में भी इनका जमावड़ा लगा रहता है। पिछले कुछ महीनों में दर्जनों वाहन चालक इन पशुओं के कारण सड़क हादसों में अपनी जान गवां चुके हैे। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इसके बाद भी नगर निगम और पुलिस अधिकारी आंखें मूंदे बैठे है। जीटी रोड पर लघु सचिवालय, बस स्टैंड, शुगर मिल, सेक्टर-25, 29 और सनौली रोड पर सब्जी मंडी के पास लावारिस पशुओं का राज है। इनकी वजह से वाहनों चालकों को सड़क से गुजरने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
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सड़क पर लावारिस घूमने वाले गोवंश पर यातायात पुलिस और नगरपालिका प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे तो गौ भक्ति का पाठ पढ़ाने वाले भी आंखें मूंदे हुए है। इनकी वजह से होने वाले हादसों में दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, तो सैकड़ों घायल हो चुके हैं। लघु सचिवालय के सामने जीटी रोड पर दर्जन भर लावारिस गाय जीटी रोड पर बैठकर वाहन चालकों का रास्ता रोके रहती हैं। इस रास्ते से प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते है, लेकिन उन्हें यह गोवंश दिखाई नहीं देता।

आईजी ने चलाया था अभियान
तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव ने अपने कार्यकाल में लावारिस पशुओं को गौशालाओं में छोड़ने का अभियान चलाया था। गायों को पकड़कर गौशालाओं में छोड़ने की ड्यूटी पुलिस कर्मियों की थी। लेकिन, समय के साथ यह अभियान गुम हो गया। फिलहाल पुलिस और नगर निगम ने इन बेसहारा पशुओं के प्रति लापरवाह बना हुआ है।
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यहां है आवारा पशुओं का जमावाड़ा
जीटी रोड पर लघु सचिवायल के सामने, बस स्टैंड के सामने, सनौली रोड पर सब्जी मंडी के पास, गोहाना रोड पर शुगर मिल के पास, सेक्टर-25 और 29 के सामने जीटी रोड पर, समालखा के पास जीटी रोड पर।

गाय भी तोड़ रहीं दम
जीटी रोड पर बैठीं लावारिस गाय भी सड़क हादसों में घायल होकर जान गवां देती हैं। वाहनों की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से घायल हुई गाय खून से लथपथ हालत में कूड़े के ढेरों में पड़ी रहती हैं। ये इलाज के अभाव में दम तक तोड़ देती हैं।

गौभक्तों के दावों पर भी सवाल
जीटी रोड पर सैकड़ों की संख्या में बैठी गायें गौभक्तों पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के बीच में गाय कूड़े में घूमती रहती हैं। इतना सब देखने के बाद खुद को गौभक्त कहलाने वाले व्यक्ति भी इनकी मदद नहीं करते।

लावारिस गाय बनतीं तस्करों का शिकार
शहर की अधिकतर गौशालाओं में क्षमता से अधिक गाय हैं। गो तस्करों से बरामद होने वाली गायों को गौशालाओं में रखा जाता है। कॉलोनियों और रोड पर घूमने वाली लावारिस गायें तस्कारों का आसानी से शिकार बन जाती हैं। पशु तस्कर आवारा गायों का गाड़ी में डालकर ले जाते हैं और फिर ज्यादातर को काट दिया जाता है।

पशुपालकों की भी है बड़ी जिम्मेदारी
जिले में बड़ी तादाद में पशुपालक हैं। शहर के कई मोहल्लों में पशुओं को बड़ी संख्या में पाला जाता है। इनमें से कई ऐसे पशुपालक हैं जो अपने दुधारू पशुओं खासकर गायों को दूध निकालने के बाद खुला छोड़ देते हैं। इस वजह से लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में ये पशुपालकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अगर दुधारू पशुओं को खुला न छोड़ें।

ऐसे निकल सकता है समाधान
 -पशुपालकों के चालान कर नगरपालिका शहर के प्रमुख मार्गों पर घूम रहे पशुओं की समस्या से बहुत हद तक छुटकारा पा सकती है। यदि कोई पशु दूसरी बार शहर के प्रमुख मार्गोेें या कॉलोनियों में घूमते पकड़ा जाए तो पशुपालक पर दोगुना जुर्माना लगाया जाए। यदि पशुपालक फिर भी न माने तो उसके खिलाफ एफआईआर की जाए।
 -जागरूकता के लिए बैनर-पोस्टर लगाने चाहिए। यह काम पुलिस प्रशासन और प्रबंधन का है। यातायात पुलिस के पास बल नहीं है, तो होमगार्ड के जवानों की ड्यूटी ली जा सकती है।


बेसहारा गायों को पकड़कर गौशालाओं में छोड़ा जाएगा। इसके लिए कर्मचारियों की टीमें बनाई जाएंगी। सड़क हादसों में गाय भी घायल हो रही है। शहर में जल्द इसके लिए बड़ा अभियान चलाया जाएगा।
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सुरेश वर्मा, मेयर नगर निगम पानीपत
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