यमुना से सटे पत्थरगढ़ गांव के एक पशु बाड़े में घुसे आवारा कुत्तों ने भेड़ों को नोच दिया। इससे 46 भेड़ों की मौत हो गई और 34 भेड़ें घायल हो गईं।
घायल भेड़ों का पशु चिकित्सकों ने इलाज शुरू कर दिया है। वहीं, क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की है।
पत्थरगढ़ निवासी पालेराम ने बताया कि वह भेड़ें पालने का काम करता है और गांव में ही उसका पशु बाड़ा है। मंगलवार रात को आवारा कुत्ते बाड़े में घुस गए और भेड़ों के झुंड पर हमला बोल दिया।
इस दौरान कुत्तों ने भेड़ों को नोच दिया। जिससे 46 भेड़ों की मौत हो गई और करीब 34 भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं।
बुधवार सुबह जह वह बाड़े में पहुंचा तो उसके पांव तले जमीन खिसक गई। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर एकजुट हो गए और जिला प्रशासन को घटना की सूचना दी। वहीं चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जाकर घायल भेड़ों का इलाज किया।
एक सप्ताह में इस तरह की दूसरी घटना
यमुना की तलहेटी और आसपास के आवारा कुत्ते जंगली पशुओं पर ही हमला करते थे। यह पहली बार है कि कुत्ते घुसे किसी पशु बाड़े में हों।
गत सप्ताह भी कुत्तों ने नीलगाय के दो बच्चों को अपना शिकार बनाया था। गत वर्ष गांव अधमी, जलमाना और नन्हेडा में कुत्तों ने हिरण के तीन बच्चों को मार दिया था।
कुत्तों को पकड़वाने की मांग की
आसपास के लोगों में कुत्तों का डर घर कर गया है। लोगों ने प्रशासन से इन कुत्तों को पकड़वाने की मांग की है। पत्थरगढ़ के सरपंच अमजद मजिदी, पूर्व सरपंच सालिम अहमद, नवादा के पूर्व सरपंच चौधरी बशीर, नवादा आर के पूर्व सरपंच जिले नरवाल ने कहा कि कुत्तों का हमला खतरनाक है। लोगाें को अब अपने पशुओं की सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है।
छिन गया रोजगार
पालेराम हिमाचल प्रदेश से भेड़ों को लाता था और उनके सहारे अपने परिवार का पालन पोषण करता था। पालेराम ने बताया कि उसकी सात लड़कियां हैं।
उसने सोचा था कि भेड़ों का काम कर वह उन सब की शादी करेगा, लेकिन आवारा कुत्तों ने एक ही रात में उसके सारे सपनों पर पानी फेर दिया। उसने बताया कि भेड़ों के मरने से उसे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।