पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में रविवार को तीन दिवसीय सांग महोत्सव का रंगारंग समापन हुआ। अंतिम दिन राम शरण एंड पार्टी ने ध्रुव भगत सांग की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। मुख्यातिथि गजेंद्र फोगाट और कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। मुख्यातिथि गजेंद्र फोगाट ने सांग को हरियाणवी संस्कृति की पहचान बताई।
फोगाट ने कहा कि बेशक पहले यह मनोरंजन का मुख्य साधन होता था परंतु दादा लख्मीचंद सोशल वेलफेयर ट्रस्ट जैसी संस्थाएं निरंतर सांग के आयोजन से संस्कृति को बचाने का जो प्रयास कर रहे हैं। वह प्रशंसनीय है। वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि राजा उत्तानपाद को अपनी पत्नी सुनीति से विवाह के कई वर्षों के बाद भी कोई संतान नहीं हुई। एक दिन नारद ने रानी सुनीति से कहा कि जब राजा दूसरा विवाह करेंगे। तब उनको तथा उनकी नई पत्नी दोनों को संतान की प्राप्ति होंगी। सुनीति ने अपने माता-पिता से जिद करके अपनी छोटी बहन सुरीति का विवाह राजा से करा दिया। सुरीति इस बात से निराश थी कि उसकी बड़ी बहन ने एक बूढ़े आदमी से उसकी शादी कराकर उसकी जिंदगी से खिलवाड़ किया है। नई पत्नी ने राज्य की सीमा पर पहुंचने पर राजा को यह वादा पूरा करने के लिए मजबूर किया कि वह उनके महल में तभी जाएगी जब वे उसकी बड़ी बहन जो राजा की पहली पत्नी है को उनके राजमहल पहुंचने के तुरंत बाद दूसरे घर में भेज देंगे। उसे प्रतिदिन सवा किलो अनाज खाने को देंगे और उसके गर्भ से उत्पन्न पुत्र को राज्य प्रदान करेंगे। राजा ने मजबूरी में यह वादा मान लिया। कुछ वर्षों के बाद बड़ी रानी सुनीति ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम ध्रुव रखा गया। बाद में छोटी रानी सुरीति ने भी एक पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम उत्तम रखा गया।
कार्यक्रम में समाजसेवी किन्नर डेरा से महंत बेबी शर्मा, डाहर प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण समाज से सतीश गौतम और गुरुग्राम से समाजसेवी राम निवास शर्मा ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। मेहमानों का स्वागत दादा लख्मीचंद सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा और कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने पौधे रोपित गमले भेंट कर किया। मंच संचालन दीपक शर्मा ने किया। संत परशुराम ने भी सांग परंपरा को संजोने के लिए संस्था को आशीर्वाद दिया। डॉ. बालकिशन का राज्य गीत बजाया गया। जिस पर सभी दर्शकों ने खड़े होकर हरियाणा की शान में अपना विशेष योगदान दिया।इस अवसर पर सुरेश शर्मा, जसमेर गौतम, कंवरभान शर्मा, नरेंद्र गर्ग, उम्मेद कवि, दिनेश जून, रामलाल भाटिया और कुलदीप रोहिल्ला आदि उपस्थित रहे।