स्वास्थ्य विभाग के जिले में चलाए गए राष्ट्रीय कृमि मुक्त अभियान को पहले ही दिन झटका लग गया। कुछ निजी स्कूलों ने स्कूल में पढ़ने वाले किसी भी बच्चे को पेरेंट्स की परमिशन के बिना खुराक देने मना कर दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग की टीम निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी।
अभियान के पहले दिन छह से 19 साल तक के एक लाख 82 हजार 750 बच्चों को एलबेंडाजोल की खुराक दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान 20 फरवरी तक चलाया जाएगा। पहले दिन जो बच्चे खुराक लेने से रह गए हैं, उन्हें बाद में खुराक दी जाएगी।
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय कृमि मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले में कक्षा छठी से 12वीं तक के छह से 19 साल के तक के बच्चों को एलबेंडाजोल की खुराक दी गई। जिले में चलाया गया यह अभियान बहुत हद तक सफल रहा।
कुछ निजी स्कूलों को छोड़ दें तो सभी सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों को एलबेंडाजोल की खुराक दी गई। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की माने तो कई निजी स्कूल प्रमुखों ने बच्चों को खुराक देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसका साइड इफेक्ट होता है।
खुराक लेने के बाद बच्चों की तबीयत तक बिगड़ने के चांस होते हैं। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने ऐसे स्कूलों के प्रबंधन को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।
परिजनों की अनुमति के बाद देंगे खुराक
स्वास्थ्य विभाग की टीमें निजी स्कूलों में बच्चों को एलबेंडाजोल की खुराक देने पहुंची तो कुछ स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को किसी भी प्रकार की खुराक देने से इनकार कर दिया। स्कूल प्रबंधन का तर्क था कि वे बच्चों के पेरेंट्स की परमिशन के बिना किसी प्रकार की खुराक नहीं दे सकते।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को परमिशन लेने के बाद संपर्क करने की बात कही है। राष्ट्रीय कृति मुक्त अभियान चिकित्सकों के सुपरविजन में चला। इसमें सभी पीएचसी, सीएचसी के डॉक्टरों और आशा वर्कर की ड्यूटियां लगाई गई थीं। अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग का भी सहयोग लिया गया। अभियान में कहीं लापरवाही न बरती जाए, इसके लिए गठित टीमों ने जिले में दौरा करते हुए जांच की।
राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस पर जिले भर में एक लाख 82 हजार 750 बच्चों को एलबेंडाजोल की खुराक दी गई। कुछ निजी स्कूलों ने बच्चों के अभिभावकों की अनुमति के बाद ही खुराक देने की बात कही है। यह अभियान 20 फरवरी तक चलाया जाएगा। वंचित रहे बच्चों को शेष दिनों में खुराक दी जाएगी।
डॉ. मुनीश कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।