पानीपत/समालखा। पुलिस की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने ह्यूमन वेल्फेयर क्रेडिट एंड थ्रिप्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के एक शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की इस मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है। अब तक दो सीएससी संचालकों को गिरफ्तार किया है। यह सोसाइटी अधिकारियों पर सीधी पहली कार्रवाई है। इस मामले में जिले के विभिन्न थानाें में सोयाइटी के निदेशकों से लेकर एजेंट तक के खिलाफ धोखाधड़ी करने के आठ मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह ने बताया कि गत दिनों विभिन्न फरियादियों ने कार्यालय में पेश होकर उक्त सोसाइटी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायतें दी थीं। उक्त सभी शिकायतों की जांच स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट पुलिस टीम द्वारा कराई थी। जांच पश्चात संबंधित थाना में सोसाइटी के अधिकारियों व एजेंटों के खिलाफ आठ अभियोग दर्ज किए। स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए सोमवार को सोसाइटी की पानीपत की सभी ब्रांच के हेड आरोपी बिजेंद्र निवासी मच्छरौली को गिरफ्तार किया है। आरोपी को दो दिन के रिमांड के बाद रविवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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ऑप्शन वन के नाम पर बनाई कंपनी
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी बिजेंद्र को दो दिन के रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ में खुलासा किया कि सोसाइटी के सीएमडी समीर व अन्य ने वर्ष 2013 में ऑप्शन वन के नाम से एक कंपनी बनाई थी। कंपनी लोगों से एफडी व आरडी में मोटे मुनाफे की बात कहती थी। कंपनी ने पहला कार्यालय पानीपत में संजय चौक पर खोला था। वह वर्ष 2013 में कंपनी में एजेंट के तौर पर काम करने लगा और उसने काफी लोगों के पैसे निवेश कराए। कंपनी ने उसे पानीपत का प्रमुख बना दिया। कंपनी के पास हरियाणा में काम करने का लाइसेंस नहीं था। कंपनी के निदेशक ने वर्ष 2016 में ह्यूमन वेल्फेयर क्रेडिट एंड थ्रिप्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के नाम से लाइसेंस बनवाया। इसमें भी कंपनी को हरियाणा में काम करने का लाइसेंस नहीं मिला। उन्होंने ऑप्शन वन कंपनी में लोगों से निवेश कराया और सारा पैसा उक्त सोयाइटी में ट्रांसफर कर दिया। सोसाइटी की पानीपत के बाद समालखा में शाखा शुरू की। उसे फिर समालखा ब्रांच का प्रमुख बना दिया। जहां उसने अपने नीचे और भी अपने साथियों को जोड़ लिया। इसके बाद पानीपत में नूरवाला बिचपड़ी चौक पर ब्रांच (सुविधा केंद्र) खोलकर परमानंद चतुर्वेदी को शाखा प्रमुख बना दिया। वह जिले की दोनों शाखाओं का काम देखता था। इसके बाद जिला में विभिन्न स्थानों पर सुविधा केंद्र खोलकर लोगों से फिक्स डिपॉजिट (एफडी), आरडी, सुकन्या समेत अन्य योजनाओं में आरबीआई की गाइडलाइन से ज्यादा रिटर्न देने की बात कहकर निवेश कराया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि पानीपत की सभी शाखा उनकी देखरेख में काम करती थी। लोगों की मैच्योरिटी पूरी हो जाने पर उनको सुविधा केंद्र पर नकद के रूप में जमा हुई राशि में से भुगतान कर दिया जाता था। सोसाइटी की दोनों करंसी चेस्ट में जमा बाकी पैसे आगे भेज देते थे। सोसाइटी ने आरोपी बिजेंद्र को कई बार विदेश यात्रा भी कराई। आरोपी बिजेंद्र के बैंक खातों में सात लाख रुपये मिले हैं।
यह है मामला
देवनगर के इशाक ने पुलिस को शिकायत में बताया था कि लवली खन्ना निवासी किला व परमानंद निवासी शिव नगर कृष्णपुरा ने उसे ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी में पैसे निवेश करने की कही थी। उसको विश्वास में लेकर हर रोज एक हजार रुपये के हिसाब से देने शुरू कर दिए। उसने एक साल में करीब 3.86 लाख रुपये निवेश किए। उसने साल पूरा होने पर पैसे वापस देने की कही तो लवली व परमानंद बहाने बनाने शुरू कर दिए। पुलिस ने जांच के उपरांत दिसंबर 2024 में तहसील कैंप थाना की पुलिस ने अभियोग दर्ज कर किया था। वहीं अन्य कई मामलों में शिकायत पर केस दर्ज किया था।