इंसान वही महान होता है जिसका जीवन स्वयं के बजाय दूसरों के लिए समर्पित है। मानवता को समर्पित ऐसे ही एक व्यक्ति हैं वार्ड -12 निवासी निफा संस्था पानीपत के प्रधान प्रवीन वर्मा। जुलाई 2018 में एक बच्चे की स्कूल वैन के नीचे आने से घायल होने पर उन्होंने उस पीड़ित बच्चे में अपने बच्चे को महसूस कर ऐसे लोगों की मदद के लिए ठान लिया। जो रुपयों के अभाव में दम तोड़ देते हैं। प्रवीन पानीपत में रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर और फॉगिग अभियान शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे। उपलब्धियों के लिए उन्हें हरियाणा समेत अन्य राज्यों में भी सम्मानित किया जा चुका है।
पहला केस : सेव आयुष लाइफ के नाम से ग्रुप बनाया
9 जुलाई 2018 को कुटानी रोड निवासी 5 साल का आयुष स्कूल वैन के नीचे आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल लाया गया। उसके इलाज के लिए लाखों रुपयों की जरूरत थी और उसके ऑटो चालक पिता ललित के पास इतने रुपये नहीं थे। उन्होंने ऑटो, मकान तक गिरवी रख दिया पर पर्याप्त रुपये जमा न हो सके। जब निफा पानीपत के प्रधान प्रवीन वर्मा को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने व्हाट्सएप पर सेव आयुष लाइफ के नाम से ग्रुप बनाया व उसमें शहर के प्रतिष्ठ लोगों, समाजसेवियों को जोड़ा। इसके बाद मात्र 2 दिन में साढ़े 11 लाख रुपये इकट्ठा हो गए।
दूसरा केस : मूंगफली की रेहड़ी लगाने वाले की मदद की
सनौली रोड पर मूंगफली की रेहड़ी लगाने वाले वार्ड 11 निवासी राजकुमार की दोनों किडनी फेल हो गई थी। उनकी घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। जानकारी मिलने पर प्रवीन ने पहले केस में बनाए सेव आयुष लाइफ ग्रुप में पीड़ित राजकुमार की जानकारी शेयर करते हुए फिर से मदद की गुहार लगाई। उनकी इस गुहार पर करीब 80 हजार रुपये चंद समय में ही इकट्ठा हो गए थे। इनसे राजकुमार का इलाज शुरू किया गया। हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
तीसरा केस : एक्सीडेंट में घायल मोहित के लिए जमा किए तीन लाख
मार्च 2018 में बाबरपुर अड्डे के पास हुए हादसे में कार सवार तीन में से दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे में एक छात्र नूरवाला रोड निवासी मोहिल गंभीर रूप से घायल हो गया था। वह दो माह से भी ज्यादा समय एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में कोमा में उपचाराधीन रहा। मोहित के पिता की भी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। जिन्होंने मदद के लिए गुहार लगाई। इस गुहार पर फिर से सेव आयुष लाइफ ग्रुप में जुड़े लोगों ने ग्रुप एडमिन प्रवीन ने गुहार लगाई। जिस गुहार पर एक बार फिर मिसाल कायम करते हुए लोगों ने 3 लाख रुपयों से उनकी मदद की। वर्तमान समय में मोहित बिल्कुल स्वस्थ है।
चौथा केस : प्रिंसिपल की मदद के लिए आगे आए उनके पढ़ाए पुराने विद्यार्थी
टैगोर स्कूल में पढ़ाने वाली वाइस प्रिंसिपल लक्ष्मी की दोनों किडनी फेल हो चुकी थी। उनके पति भी शारीरिक तौर पर विकलांग थे। इसके अलावा उनका एक बेट भी अक्सर बीमार रहता है। लक्ष्मी की मदद के लिए सेव आयुष लाइफ ग्रुप की गुहार पर उनके पढ़ाए पुराने विद्यार्थी आगे आए। जिन्होंने लक्ष्मी के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपयों सहित उनके घर पर राशन, नौकरानी सहित अन्य कई तरह की सुविधा उपलब्ध करवा दी थी। इलाज के दौरान लक्ष्मी की भी मौत हो गई थी।
पांचवां केस : मासूम के श्रमिक पिता को दिया दो क्विंटल अनाज और अन्य सामान
थाना चांदनीबाग क्षेत्र की एक कॉलोनी में 3 साल की मासूम से एक आरोपी श्रमिक ने दुष्कर्म किया था। जिसके बाद बच्ची के इलाज के लिए उसके श्रमिक पिता ने काफी रुपया लगाया। बच्ची कु छ ठीक हो जाने पर घर पर आ गई। एक समय ऐसा आया, जब अपनी लाडली के इलाज के लिए पिता ने काम पर जाना छोड़ दिया व पूरा ध्यान मासूम पर ही लगाया। प्रवीन वर्मा ने फिर से गुहार लगाई व अलग-अलग व्यक्तियों की मदद से दो क्विंटल से भी ज्यादा राशन इकट्ठा किया व मासूम के परिवार को दिया।
छठा केस: 2 लाख रुपये इकट्ठे कर पीड़ित महिला के परिजनों को दिए
तहसील कैंप निवासी महिला सुमित्रा वर्मा की भी दोनों किडनी फेल हो चुकी थी। परिवार की जमा पूंजी इलाज में लगने के बाद ढाई लाख की जरूरत थी। पीड़िता के बेटे की ओर से गुहार लगाने पर प्रवीन वर्मा ने इस केस की पूरी स्टडी कर जनता से गुहार लगाई। इसके बाद सराफा मार्केट के व्यापारियों समेत अन्य लोगों ने 2 लाख रुपये इकट्ठे कर परिजनों को देकर इलाज का खर्च उठाने की बात कही थी। लेकिन सुमित्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
सातवां केस : कैंसर पीड़ित बेटी के इलाज के लिए की मदद
बरसत चुंगी निवासी फाइनल ईयर की छात्रा बिटिया प्रवीन लीजा गले के कैंसर से पीड़ित है और चौथे स्टेज पर है, लेकिन वो कैंसर को हराना चाहती है। पेशे से इलेक्ट्रीशियन पिता ने उसके इलाज के लिए अपनी मकान, जमीन सब गिरवी रख दिया। फिर भी इलाज के लिए 5 लाख रुपयों की जरूरत थी। बिटिया के पिता ने प्रवीन वर्मा से गुहार लगाई तो उन्होंने ग्रुप के माध्यम से लोगों से मदद की अपील की। इसके बाद महज 12 घंटों में पांच लाख रुपये इकट्ठे हो गए थे। बिटिया का इलाज दिल्ली के एम्स अस्पताल से चल रहा है। तीन माह बाद उसका ऑपरेशन होने की संभावना है।