इसराना। पंचायती राज संस्थाओं के तहत दो नवंबर को संपन्न हुए ग्राम पंचायत चुनाव में गांव बुआना लाखू में एक अफसर की मामूली चूक की वजह से कुछ घंटे के लिए दो सरपंच बन गए। प्रशासन ने भी दोनों को विजेता का प्रमाणपत्र दे दिया, लेकिन कुछ ही देर में यह गलती भारी पड़ गई। गुस्साए लोगों ने गांव से लेकर अफसरों के कार्यालयों तक धरना प्रदर्शन देना शुरू कर दिया। अफसरों ने जब पड़ताल की तो गलती पकड़ में आ गई। जिसके बाद रात में ही रिजल्ट संशोधित कर विजेता को प्रमाणपत्र देकर दूसरे को दिए गए प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया है।
पड़ताल में सामने आया कि गांव के एक बूथ पर बैठे पीठासीन अधिकारी से दोनों प्रत्याशियों के परिणाम की अदला बदली हो गई। जब सभी बूथों का कुल योग किया गया तो विजेता हार गया और दूसरे नंबर पर रहने वाला प्रत्याशी जीत गया। गांव के लोगों ने जब इसकी बूथवार गणना की तो उन्हें पता चला कि यह गलती हुई है। प्रशासन को इससे अवगत कराया गया। जिसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने संशोधित रिजल्ट को अपडेट करते हुए विजेता को प्रमाणपत्र दिया और पहले वाले प्रत्याशी के प्रमाणपत्र को रद्द करने के लिए भी लिख दिया। हालांकि इस गलती की वजह से गांव में अभी तक तनातनी का माहौल है। ग्रामीण भी प्रशासन और विपक्ष पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
पंचायती चुनाव में सरपंच पद के दावेदारों में बुआना लाखू गांव से सात प्रत्याशी चुनाव में खड़े थे। इनमें से दो प्रत्याशियों कुलदीप और मोहित में कड़ा मुकाबला था। इस गांव में बूथ नंबर 65, 66, 67, 68, 69 और 270 बनाए गए थे। प्रिजाइडिंग ऑफिसर से बूथ नंबर 69 पर गलती से रिजल्ट बदल गया। यहां प्रत्याशी मोहित को मिले वोट कुलदीप के खाते में जुड़ गए और कुलदीप के वोट मोहित के खाते में जुड़ गए। जिसके बाद सभी बूथों के योग के आधार पर कुलदीप को विजयी घोषित कर दिया गया। कुलदीप को विजेता का प्रमाणपत्र भी दे दिया गया। गलती पकड़ में आने पर रिजल्ट को बदलते हुए मोहित को विजेता घोषित किया गया।
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अब 51 वोटों से हुआ विजयी
मोहित मलिक ने कहा कि उनकी वोट 1051 थीं। उन्हें 51 वोटों से विजय मिली है। पहले अफसरों की गलती की वजह से सभी बूथों का योग सही नहीं हुआ। शिकायत दी तो इसकी पड़ताल की गई और गलती पकड़ में आई। जिसके बाद प्रशासन ने गलती सुधारी, लिखित में भी दिया और विजेता प्रमाणपत्र भी दिया।
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मुझे कोई सूचना नहीं दी
कुलदीप ने बताया कि अफसरों ने रिजल्ट घोषित करने के बाद मुझे प्रमाणपत्र दिया है। इसके बाद दूसरे को प्रमाण पत्र देने की सूचनाएं तो मिल रही हैं लेकिन मेरे पास किसी भी अधिकारी ने कोई फोन या मैसेज नहीं दिया। न ही मुझे इस बारे में अब तक अवगत कराया गया है।
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पीठासीन अधिकारी की गलती की वजह से एक बूथ का रिजल्ट बदला गया था। जिसके बाद इसे संशोधित किया गया। इस संशोधित रिजल्ट को पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है।
- नवदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल एवं रिटर्निंग अफसर, इसराना