पानीपत। हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य थीम पर 28 जुलाई से तीन अगस्त तक सिविल अस्पताल, सामुदायिक केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कैंप लगाकर मरीजों को जागरूक किया गया। जिले भर में 204 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें चार हेपेेटाइटिस सी और दो हेपेटाइटिस बी के रोगी मिले। उन्हें सिविल अस्पताल रेफर किया गया है। यहां से इनका इलाज शुरू हो गया है। पिछले पांच वर्ष में स्वास्थ्य विभाग ने काला पीलिया के 4187 से ज्यादा मरीजों को चिह्नित किया है। इनमें से 3638 मरीज ठीक हो चुके हैं। डॉक्टरों की अपील है कि मरीज दवा का कोर्स पूरा करें, ताकि पूरी तरह स्वस्थ हो सकें।
साल दर साल ऐसे मिले हेपेटाइटिस के मरीज
2017 में 300, 2018 में 975, 2019 में 1121, 2020 में 314 व अप्रैल 2021 से जून 2022 तक 487 हेपेटाइटिस के मरीज मिल चुके हैं।
हेपेटाइटिस सी का मुफ्त इलाज
सिविल अस्पताल में 17 जून 2017 से हेपेटाइटिस का मुफ्त इलाज शुरू हुआ था। 3638 से ज्यादा मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। मरीजों को बुधवार को सिविल अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी काला पीलिया के बारे में जागरूक किया जाता है।
हेपेटाइटिस की पुष्टि होने पर मरीज को एक कूपन जारी किया जाता है। इस कूपन के जरिये मरीज प्राइवेट लैब में निशुल्क वायरल लोड टेस्ट कराता है। जांच रिपोर्ट के बाद उसी कूपन से मरीज को मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। कोर्स पूरा करने पर तीन माह का आराम दिया जाता है। इसके बाद दोबारा जांच की जाती है। रोग के लक्षण हैं तो दोबारा तीन माह तक इलाज कराना पड़ता है।
संक्रमित स्त्री के गर्भस्थ शिशु में भी फैल सकता है संक्रमण
हेपेटाइटिस बी का मुफ्त इलाज 17 जून 2020 से शुरू है। हेपेटाइटिस की पांच कैटेगरी ए, बी, सी, डी और ई हैं। जिले में हेपेटाइटिस सी के मरीज अधिक हैं। हेपेटाइटिस सी का इलाज तीन माह तक चलता है। हेपेटाइटिस बी में कई जटिलताएं हैं। वायरल लोड 20 हजार से कम होने, लीवर खराब होने पर इलाज लंबा चलता है। हेपेटाइटिस का वायरस संक्रमित स्त्री के गर्भस्थ शिशु में भी फैल सकता है। सरकार ने गर्भवती का टेस्ट अनिवार्य कर दिया है।
- डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल अधिकारी हेपेटाइटिस