पानीपत। सिवाह गांव की बहू सुमन प्रजापति ने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में राष्ट्रीय स्तर पर भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीतकर गांव ही नहीं जिले का भी नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने इसमें 87 किलोग्राम भार उठाकर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने पहले प्रयास में 81 किलोग्राम वजन उठाया, जबकि अन्य खिलाड़ियों ने 50 से 70 किलोग्राम से इसकी शुरुआत की।
सुमन इससे पहले पैरा राष्ट्र मंडल खेलों में भी पदक के लिए खुद को आजमा चुकी हैं। उनके एक सामान्य गृहणी से राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की कहानी भी सबसे हटकर है। गांव में वीरवार को सुमन का स्वागत किया जाएगा। इसको लेकर गांव में तैयारी शुरू कर दी है। सिवाह निवासी सुमन प्रजापति बुधवार को जवाहर लाल नेहरू खेल स्टेडियम नई दिल्ली में बुधवार को खेलो इंडिया पैरा गेम्स में मैदान पर उतरीं। वे 55 किलोग्राम भार वर्ग के भारोत्तोलन में शामिल हुईं। उन्होंने पहले ही प्रयास में सीधे 81 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया। वे पहले ही प्रयास में सफल हाे गई। उन्होंने दूसरी बार में 87 किलोग्राम वजन उठाकर अपना पदक पक्का कर लिया। उन्होंने तीसरे प्रयास में 91 किलोग्राम का प्रयास किया। वे इस प्रयास को पूरा नहीं कर पाई। उन्होंने 87 किलोग्राम भार वर्ग उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता में रजत पदक विजेता 72 और कांस्य पदक विजेता ने 60 किलोग्राम वजन उठाया।
प्रदीप ने बताया कि उसकी पत्नी सुमन को बचपन में पोलियो को गया था। जिससे उनका एक पैर खराब हो गया था। सुमन ने शादी के बाद घर की जिम्मेदारी संभाली और शुरुआत में अपना सिलाई सेंटर चलाया। यहां लड़कियों को सिलाई सिखाती थी। इसके साथ अपना खेलों में भी भाग लेती थी।
बॉक्स
पति और कोच को दिया पदक का श्रेय
सुमन प्रजापति ने स्वर्ण पदक का श्रेय अपने पति प्रदीप कुमार और कोच नवीन कादियान को दिया है। उन्होंने बताया कि वह एक साधारण महिला का जीवन जी रही थीं। उनके पति प्रदीप ने उनको खेलों में आगे आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सिवाह गांव स्थित मैक्स फिटनेस जिम में भारोत्तोलन का अभ्यास कराया। यहां कोच नवीन कादियान ने उनका अभ्यास कराया। उन्होंने इन सबके सहयोग से पदक जीता है। वह चीन में पिछले दिनों आयोजित एशियाई पैरा गेम में 55 किलो भार वर्ग में भी दमखम दिखा चुकी हैं।
पति वॉलीबॉल छोड़ भारोत्तोलन में लेकर आएं
सुमन ने बताया कि उन्होंने 2021 में ही भारोत्तोलन की तैयारी शुरू की थी। वह अपनी मेहनत और लगन से बहुत कम समय में इस मुकाम पर पहुंच गई।
उन्होंने बताया कि वह शुरुआत से वालीबॉल खेलती थी। करीब तीन साल तक वॉलीबॉल खेली और स्वर्ण पदक भी जीता। उसके पति प्रदीप उसको एक दिन भारोत्तोलन प्रतियोगिता में ले गए। उन्होंने उनसे वजन उठवाकर देखा। उन्होंने पहली बार में ही काफी वजन उठा लिया। उन्होंने गांव स्थित मैक्स फिटनेस जिम में अभ्यास शुरू कर दिया। वह अब तक कई पदक जीत चुकी हैं।