पानीपत/समालखा। वसंत पंचमी पर चुलकाना धाम में श्री श्याम बाबा के अंग वस्त्र बदले जाने का वर्षों पुराना रिवाज है। पुराने अंग वस्त्र को पाने के लिए दूर-दूर से भक्त धाम पर आते हैं। इसे पाने के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ जमा रहती है। माना जाता है कि इस अंग वस्त्र को पाने वाले श्रद्धालु के घर में सुख-समृद्धि वास करती हैं। मंदिर प्रबंधन ने इसको लेकर व्यवस्थाओं को चाक चौबंद कर दिया है।
नववर्ष आगमन के पश्चात वर्ष में छह ऋतुओं का आगमन होता है। इसमें सर्वप्रथम वसंत ऋतु आती है। वसंत ऋतु के आगमन पर शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि को वसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन को सरस्वती पूजा के साथ श्याम बाबा के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। वृंदावन ट्रस्ट के प्रधान राकेश बंसल व महिला इकाई मंडल की मुख्य सुनीता भारद्वाज ने बताया कि श्री बाबा श्याम को नित्य एक से बढ़कर एक धागा व फूलों की सुंदर मालाओं से सजाया जाता है लेकिन एक ऐसा अंग वस्त्र जो संपूर्ण वर्ष बाबा के साथ लिपटा रहता है और सिर्फ बसंत पंचमी के दिन ही वह बदल जाता है। बाबा के इस वस्त्र को पाने के लिए मंदिर प्रांगण में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। ऐसा माना जाता है कि इस वस्त्र में इतनी ताकत होती है कि जिस घर में यह वस्त्र घर के पूजा स्थल में रखा जाता है। उस घर में सुख शांति बनी रहती है। बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह पर्यावरण के बदलाव और नए जीवन के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। । दिनेश गुप्ता और महिला मंडल से अमृता, संगीता ने बताया कि इस दिन सर्वप्रथम श्याम बाबा को पंचामृत से स्नान करवाया जाता है। फिर पीले रंग का अंग वस्त्र पहनाकर उसके ऊपर पोशाक और पीले फूलों का शृंगार किया जाता है। मानसिक शांति, नव ऋतु शुरू होने और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन उपयुक्त माना जाता है।