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लिंगानुपात : प्रदेश में 17 वें स्थान पर खिसका पानीपत

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पानीपत। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का नारा देने वाली टेक्सटाइल नगरी लिंगानुपात में लगातार पिछड़ रही है। पिछले पांच माह का लिंगानुपात 885 दर्ज किया गया है। पानीपत में एक जनवरी से 31 मई तक 12427 लड़कों ने जन्म लिया, इनमें 6592 लड़के व 5835 लड़कियां है। पानीपत फिलहाल प्रदेश में लिंगानुपात में 17 वें स्थान पर है।
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पानीपत से पीछे कैथल, जींद, रोहतक, रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ है। चरखीदादरी 963 अंक के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। पानीपत के इस आंकड़े ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान भी धीरे धीरे दम तोड़ रहा है। लिंगानुपात के लगातार गिरने का बड़ा कारण पिछले दो साल में लिंग जांच के खिलाफ हुई नाममात्र कार्रवाई हैं। पिछले दो साल में लिंग जांच पर महज तीन कार्रवाई हुई हैं। चार साल में चार पीएनडीटी इंचार्ज बदले जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग पिछले चार साल में जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने तक ही सीमित रहा लेकिन कार्यक्रम नहीं कर पाया। पानीपत के 61 गांव ऐसे हैं जहां लिंगानुपात 700 से भी कम है। सबसे चिंताजनक स्थिति कवी, उझा, सींक, उग्राखेड़ी , मतलौडा, अहर सामुदायिक केंद्र के अंतर्गत आने वाले गांवों की है। यहां छह छह गांवों का लिंगानुपात 700 से भी कम है।
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2015 से 2020 के बीच स्वास्थ्य विभाग ने भ्रूण जांच के खिलाफ 80 रेड की। कई प्रदेशों में बड़े स्कैंडल का पर्दाफाश किया गया। 100 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई की गई । इन छह सालों में हर माह औसतन आठ-नौ सफल रेड की जाती थी। 2017 में पानीपत लिंगानुपात में 946 अंक के साथ पहले स्थान पर भी रहा था। 2020 के बाद पीएनडीटी इंचार्ज बदले। पिछले चार सालों में 15 साल से भी कम रेड की गई है। जागरूकता कार्यक्रम न के बराबर हुए। समय समय पर पीएनडीटी इंचार्ज बदलते रहे। ऐसे में लिंगजांच के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई।

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पानीपत का साल दर साल लिंगानुपात



2015- 892



2016- 912



2017- 945



2018- 900



2019- 939



2020- 935



2021- 918



2022- 924



2023- 920


2024 अब तक- 885

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लिंगानुपात बढ़ाने के लिए बेहतर कदम उठाएंगे : सिविल सर्जन



लिंगानुपात बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। इस साल कई जगह कार्रवाई भी की गई है। सरकार लिंगानुपात के प्रति गंभीरता से काम कर रही है। लिंग जांच करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। समय समय पर निजी अस्पतालों व आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण भी किया जाता है। कम लिंगानुपात वाले गांवों में नुक्कड़ नाटक भी किए जाएंगे।
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- डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन
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