अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में स्वामी विवेकानंद द वाइस ऑफ यूथ दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में स्कॉलर्स को भाषण, खेल, प्रेजेंटेशन और डिस्कशन में व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर युवाओं को प्रेरित किया गया। कॉलेज में चल रहे राष्ट्रीय सेमिनार का बुधवार को समापन हो गया। हिंदू कॉलेज रोहतक के प्राचार्य अशोक बतरा और विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रांत के विभाग प्रमुख दशरथ चौहान मुख्य वक्ता रहे। विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रांत की प्रांत संगठक अलका गौरी जोशी ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।
हिंदू कॉलेज रोहतक के प्राचार्य अशोक बतरा ने स्वामी विवेकानंद द्वारा विश्व धर्म सम्मलेन में दिए गए भाषण को याद करते हुए कहा कि स्वामी ने था कि मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों आपके इस स्नेहपूर्ण स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया के सबसे पौराणिक भिक्षुओं की तरफ से धन्यवाद देता हूं। बतरा ने कहा कि दुनिया को शहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का जो पाठ विवेकानंद ने पढ़ाया है, वह दुर्लभ है। अलका गौरी जोशी ने कहा की आज की भागदौड़ की जिंदगी में किसी के पास आत्मचिंतन और गंभीर मंथन कर सकें। मानसिक अवसादों के चलते हमारा व्यक्तित्व और स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिर रहा है।
ऊर्जा को नियंत्रित करने की सीख दी
खेल, प्रेजेंटेशन और डिस्कशन के सत्र में अलका गौरी जोशी ने प्रतिभागियों के भीतर छिपी प्रतिभा और ऊर्जा को नियंत्रित करने का प्रशिक्षण दिया। जिसमें सोने के समय का ध्यान लगाने में उपयोग करने, तरक्की और आध्यात्म में सामंजस्य स्थापित करने के बारे में विस्तार से बताया।
प्रतिभागियों को सुनाईं कहानियां
दशरथ चौहान ने दूसरे एवं अंतिम दिन स्वामी विवेकानंद के जीवन, शिक्षाओं और महान विचारों पर आधारित कहानियां व शिक्षापूर्ण घटनाएं प्रतिभागियों को सुनाईं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को दान की प्रवृति रखनी चाहिए। तभी जीवन में रिश्तों की अहमियत होती है। एकाग्रता रखने वाला व्यक्ति जीवन में कभी असफलता का मुख नहीं देखता। गुलाम रहने वाले लोगों का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा की जब तक विवेकानंद की दी गई शिक्षा हमारे मन मस्तिष्क में रच-बस नहीं जाती, तब तक पारंपरिक शिक्षा ग्रहण करने का कोई औचित्य नहीं है। इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. रवि बाला, डॉ. राकेश गर्ग, प्रो. मयंक अरोड़ा, प्रो. इंदु पूनिया, प्रो. यशोदा अग्रवाल और दीपक मित्तल मौजूद रहे।