संवाद न्यूज एजेंसीपानीपत। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर अब विद्यार्थियों की पढ़ाई पर दिखाई देने लगा है। एक ओर शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यरत शिक्षकों की एसआईआर सहित अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाई जा रही है।
ऐसे में कई स्कूलों की कक्षाओं का संचालन चुनौती बन गया है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
पानीपत जिले में कुल 416 सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनमें 243 प्राइमरी स्कूल हैं। प्राथमिक स्तर पर करीब 1700 स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग 1574 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि करीब 126 पद खाली हैं। इसके अलावा जिले के कई स्कूल एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। शिक्षक संगठन का दावा है कि एसआईआर कार्य में भी करीब 40 प्रतिशत शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इससे स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
टीजीटी के 469 पद खाली : जिले में शिक्षकों के रिक्त पदों में सबसे अधिक कमी टीजीटी स्तर पर है। स्वीकृत 1451 टीजीटी पदों में से 469 पद रिक्त हैं। इसके अलावा ईएसएचएम के स्वीकृत 50 पदों में से 15 और मुख्य शिक्षक के 116 पदों में से 16 पद खाली हैं। रिक्त पदों के चलते कई विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त कक्षाओं का भार है।
शहरी क्षेत्र के कैनाल कैंप, तहसील कैंप, लालबत्ती और अग्रवाल मंडी स्कूलों के प्राइमरी व मिडिल विंग के अलावा बेगमपुर-भापनोद, लोहारी, भालसी और मतलौडा सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी सामने आई है। कई शिक्षक एसआईआर कार्य सहित अन्य विभागीय जिम्मेदारियां संभालने के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं।
शिक्षक संघ ने जताई चिंता
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के राज्य प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनाती से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पानीपत में जेबीटी के करीब 126 पद खाली हैं। एसआईआर कार्य में करीब 40 प्रतिशत शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले और संख्या पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता के अनुसार शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। एसआईआर सहित अन्य सरकारी कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी आवश्यकता के अनुसार लगाई जाती है। जहां शिक्षकों की कमी है, वहां उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। -राकेश बूरा,
जिला शिक्षा अधिकारी