पानीपत। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने स्नातक कक्षाओं के दाखिलों का शेड्यूल स्थगित कर दिया है। निदेशालय दाखिलों का शेड्यूल नए सिरे से जारी करेगा। इसका बड़ा कारण निदेशालय के पोर्टल का पुरानी शिक्षा नीति पर आधारित होना बताया जा रहा है, जबकि प्रदेशभर के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने का फैसला ले चुके थे और अधिकतर अपना सिलेबस भी तय कर चुके थे। जानकारों की मानें तो निदेशालय और विश्वविद्यालय के अधिकारी इसको लेकर लंबे समय से बैठक कर रहे थे। इसलिए निदेशालय को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 26 मई को प्रदेशभर के कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं के लिए दाखिले का शेड्यूल जारी किया था। यह शेड्यूल कोरोना से पहले की तरह का शेड्यूल था। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया था। कॉलेजों को 29 से 31 मई तक कोर्स और विषयों को अपलोड करना था और पांच जून से ऑनलाइन आवेदन शुरू करने थे। निदेशालय ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दाखिला के शेड्यूल को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है। निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि पोर्टल को नए सिरे से अपडेट किया जाएगा। इसके बाद शेड्यूल जारी किया जाएगा। इनसो के छात्र नेता बलराज देशवाल ने बताया कि यह शिक्षा निदेशालय का बड़ा फेलियर है।
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पोर्टल पुरानी शिक्षा नीति पर है आधारित
राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी सत्र से लागू करने के लिए विश्वविद्यालय पिछले एक साल से प्रयास में लगे हुए थे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इसके लिए सबसे पहले आगे आया था। वाइस चांसलर प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इसको गंभीरता से लिया था। फिर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक आगे आया था। इसके बाद प्रदेशभर के अन्य विश्वविद्यालय भी इसको अपनाने के लिए आगे आए थे। विश्वविद्यालय स्तर पर सिलेबस और कोर्स तैयार हो चुके हैं। जबकि पोर्टल पुरानी शिक्षा नीति पर आधारित है।
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एनईपी में बीच में पढ़ाई छोड़ने का अधिकार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में स्नातक चार वर्ष की होगी। विद्यार्थी किसी भी साल परीक्षा देकर अपनी पढ़ाई छोड़ सकता है। वह दोबारा उसी कक्षा से पढ़ाई भी शुरू कर सकता है। एक वर्ष की पढ़ाई करने के बाद 44 क्रेडिट स्कोर के साथ अंडर ग्रेजुएट का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। वह इसके आधार पर नौकरी भी पा सकता है। दो वर्ष में 44 क्रेडिड स्कोर के साथ अंडर ग्रेजुएट का डिप्लोमा, तीन वर्ष पर 132 क्रेडिड स्कोर के साथ बेचलर डिग्री मिलेगा। चार वर्ष पूरे होने पर 176 क्रेडिड स्कोर के साथ ऑनर्स एंड रिसर्च की डिग्री मिलेगी। इसके साथ युवाओं को संकाय के जाल से बाहर निकाला जाएगा। युवा किसी भी संकाय का विषय स्नातक में ले सकेंगे।
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एक संकाय और पूरे साल की डिग्री
पुरानी शिक्षा पद्धति में युवाओं को संकाय और उसी के विषयों में पढ़ाई करनी होती थी। तीन साल के बाद बैचलर डिग्री मिलती थी। उसको बीच में पढ़ाई छोड़ने पर दोबारा उसी कक्षा में दाखिला मिलना मुश्किल था। इसके अलावा बीए के बाद दो साल की स्नातकोत्तर की डिग्री करनी पड़ती थी।