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Panipat News: भवन निर्माण श्रमिकों की योजना में कराेड़ों का घोटाला, सहायक निदेशक समेत दो नामजद

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पानीपत। पानीपत के श्रम विभाग में श्रमिकों की भवन निर्माण योजना में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। इसमें अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का घोटाला कर दिया। फिलहाल 10 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। थाना शहर पुलिस ने इस मामले में श्रम विभाग के एक सहायक निदेशक और सहायक वेलफेयर अधिकारी को नामजद कर कई अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
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सोनीपत श्रम विभाग के उप निदेशक ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी है। उन्होंने बताया कि उनकी जांच में पानीपत श्रम विभाग में 10 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ है। इसकी जांच एसआईटी द्वारा की गई थी। उनकी जांच में सामने आया है कि श्रम विभाग के सहायक वेलफेयर ऑफिसर एनके सिंघल और सहायक निदेशक हरेंद्र मान के कार्यकाल में यह फ्रॉड हुआ है। यह जांच पानीपत के एडवोकेट सुभाष चंद्र की एडीजीपी सीआईडी को दी शिकायत के आधार पर की गई थी। उनका आरोप है कि पानीपत के श्रम विभाग में भवन निर्माण के कारीगरों व श्रमिकों की योजना में फ्रॉड किया गया है। आरोप हैं कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलकर कुछ लोगों के नाम पर योजना में करोड़ों रुपये का गबन किया है। कई मामलों में सामने आया कि लाभार्थी को योजना का पता भी नहीं और उसके नाम पर लाभ दे दिया गया।
इस मामले में बापौली निवासी सन्नी सैनी की भी शिकायत मिली थी। उन्होंने अधिकारियों पर 10 हजार रुपये लेने के आरोप लगाए थे। एसआईटी ने इस मामले को भी इसमें शामिल किया था। जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी व लापरवाही संलिप्तता मिली थी। समिति ने 17 अगस्त 2020 को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी।
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एडवोकेट सुभाष चंद्र ने आरोप लगाया कि अधिकारियों व दलालों के साथ हर योजना में हिस्सा तय है। निर्माण श्रमिकों की कॉपी जारी करने और इसके लाभ में 50 प्रतिशत अधिकारियों का हिस्सा होता था। बाकी 20 प्रतिशत दलाल और लाभार्थी को 30 प्रतिशत दिया जाता था। इसके साथ अन्य योजनाओं में यह प्रतिशत 60 और 40 का भी है।


बॉक्स
जांच रिपोर्ट तक दबा दी थी
एडवोकेट सुभाष चंद्र ने आरोप लगाया कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की गई। एक बड़े नेता के प्रभाव में इसको दबा दिया गया। उन्होंने इसके बाद हाईकोर्ट की शरण ली। अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में लिखा था कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गलत नीयत के साथ लाभार्थियों को जारी किया गया है। इसके लिए वे पात्र नहीं हैं। ऐसे में सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। श्रम विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाय 14 दिसंबर 2021 को श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष समिति फिर से गठित की गई। जिसमें पंजीकरण और लाभ का संवितरण की जांच की गई। इसकी जांच में भी आरोप सही पाए गए। विशेष समिति ने भी इस मामले की जांच रिपोर्ट पेश की। इसमें भी आरोप सही पाए गए। उन्होंने एचबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू बोर्ड के संविदा अधिकारियों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उपरोक्त कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने वाले श्रमिकों के लाभार्थियों व नामांकित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिए थे। सुभाष चंद्र ने बताया कि इस मामले में 19 नवंंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई की गई। अब अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।


इस तरह किया घोटाला
एडवोकेट सुभाष चंद्र ने बताया कि श्रम विभाग निर्माण कार्य में लगे कारीगरों व श्रमिकों को लाभ देता है। इसमें लेबर कॉपी बनाई जाती है। इसमें 90 दिन का काम देना होता है। इसके एक साल बाद योजना का लाभ लिया जा सकता है। इसमें महिला श्रमिक को रसोई के लिए 18 हजार, पुरुष को साइकिल व अन्य सामान के लिए 13 हजार रुपये दिए जाते हैं। इनके अलावा श्रमिकों की लड़कियों की शादी के लिए एक लाख देना होता है। आरोप है कि इसमें लगाए गए शादी के प्रमाण पत्र फर्जी हैं। इसके अलावा पानीपत के श्रमिकों के दूसरे जिलों में नाम दर्शाए गए हैं।

वर्जन :
सभी पात्रों को योजना के तहत लाभ दिया गया है। यह सारी राशि लाभार्थी के बैंक खाते में जाता है। यह राशि राज्य मुख्यालय से ट्रांसफर की जाती है। भवन निर्माण बोर्ड यह राशि देता है। इस तरह के आरोप निराधार हैं।

हरेंद्र मान, सहायक निदेशक श्रम विभाग।

वर्जन :
पुलिस को श्रम विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एक लिखित शिकायत जांच अधिकारी की मिली है। इसमें थाना शहर पुलिस में आईपीसी की धारा 409 व 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है। इसमें आरोपियों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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लोकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, पानीपत।
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