अंबाला-साहा हाइवे पर सरुपी देवी व परिवार द्वारा तैयार की गई मां दुर्गा की मूर्तियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। जयपुर से अंबाला आकर बसी सरुपी देवी अब किसी पहचान की मोहताज नहीं है। पति की मौत के बाद उन्होंने चार बहुओं के साथ मिलकर काम संभाला और आज वो मेहनत व लग्न की बदौलत यमुनानगर, चंड़ीगढ़ और मोहाली तक मूर्तियों को पहुंचाकर नाम कमा रही हैं। हाथ से निर्मित मूर्ति की भक्त ही नहीं बल्कि सेना सहित प्रशासनिक अधिकारी भी प्रशंसा कर रहे हैं। 70 वर्षीय सरुपी देवी ने बताया कि मूर्ति बनाने का उनका पेशा जरूर है, लेकिन वह भक्तों की श्रद्धा अनुसार काम करते हैं ताकि पवित्र मूर्ति को खरीदते समय उनके मन में किसी प्रकार की शंका न रहे, वह जो भी कार्य करते हैं वो लोगों के समक्ष करते हैं न कि पर्दे के पीछे।