आरोपियों के पास से पटवारी, नंबरदार व जिन पार्षदों की मुहर मिली है, सवाल ये है कि यह मुहर असली है और क्या इन अधिकारियों को उनकी मुहर के बारे में जानकारी थी या नहीं। आरोपियों ने यह मुहर कहां से मिली, कहां बनवाई या किसी ने इनको मुहैया कराई। आरोपियों के तार कहां-कहां जुडे हुए है, इन सब दिशा में पुलिस पूछताछ कर रही है।
आरोपियों के अटल सेवा केंद्र पर हर सरकारी दस्तावेज बनवाने के सरकारी रेट की लिस्ट लगी हुई थी। जिनमें 10 रुपये से अधिकतम 50 रुपये तक थे, लेकिन आरोपी अपनी मनमर्जी से लोगों से रुपये लेते थे। विरोध करने पर लोगों को कहते थे कि इतना स्टाफ यहां रखा है, इसकी तनख्वाह कहां से निकलेगी।
पुलिस तीनों आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ कर रही है। इनसे कई और जानकारी मिली हैं। पुलिस ने इन सब पर जांच कर रही है। इसमें जल्द ही बड़ा खुलासा किया जा सकता है। -अजीत सिंह शेखावत, एसपी।