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राहत : 14 दिन में रेड से यलो जोन में आया एक्यूआई

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पानीपत। हवा का दबाव कम होने से वीरवार को धूल के कण छटने लगे। वीरवार को धुंए की मात्रा भी हवा में काफी हद तक कम हुई। 14 दिन बाद पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स रेड व ऑरेंज जोन से गिरकर यलो जोन में आ गया। वीरवार को पानीपत का एक्यूआई 169 दर्ज किया गया है। इससे पहले 14 नवंबर को पानीपत का एक्यूआई यलो जोन में था। वीरवार को पानीपत में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 284 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। हवा में धुएं की मात्रा भी 153, कार्बन की मात्रा 70 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। हवा में कार्बन की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण शहर में चल रहे लगभग 20 हजार उद्योग व यहां से गुजरने वाले एक लाख वाहन है। अब हवा में सल्फर ऑक्साइड की मात्रा 09 व नाइट्रोजनऑक्साइड की मात्रा 31 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है।
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एनसीआर में ग्रैप चार लागू हैं। इसके तहत जनरेटर सेट , निर्माण कार्य व निर्माण सामग्री को खुले में रखने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है, लेकिन शहर में ग्रैप के नियमों का पालन नहीं किया गया। सरकारी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य तो बंद हो गए लेकिन निजी भवनों का काम लगातार चल रहा है। स्कूलों व उद्योगों में भी जनरेटर सेट चल रहे हैं। व्यस्तम रूटों से भी यातायात को डायवर्ट नहीं किया गया है। इसलिए धुएं की मात्रा हवा में काफी अधिक है।



हवा का दबाव कम हुआ है - डॉ. राजेंद्र

प्रदूषण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार का कहना है कि वीरवार को हवा का दबाव कम हुआ है। इसलिए धूल के कण हवा में ऊपर उठ रहे हैं। स्मॉग की परत काफी हद तक टूटी है। इसलिए धुआं भी आसमान में जा रहा है। वीरवार को एक्यूआई कम हुआ है लेकिन प्रशासन ने ग्रैप चार के तहत उस प्रकार से सख्ती नहीं की। जिस प्रकार से सख्ती की आवश्यकता थी। अब भी हवा में कार्बन की मात्रा बढ़ रही है। यह बेहद खतरनाक है।
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वर्जन-
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि ग्रैप चार के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। उद्योगों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। अब एक्यूआई भी कम हो रहा है।
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