पानीपत।
भारत सरकार नीति आयोग ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण की कॉपी को आरटीआई में सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है। उन्हाेंने इसे निजी सूचना बताया। आयोग इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने से इंकार कर चुका है। इस संबंध में भारत सरकार नीति आयोग के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी दीपक नेलवाल ने 16 सितंबर को इसका पत्र जारी किया है।
उन्होंने पत्र में बताया है कि आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन-8 (जे) के तहत निजी सूचना होने के कारण आरएसएस के पंजीकरण प्रमाणपत्र की कॉपी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। आरएसएस के उद्देश्यों व लक्ष्य के बारे में भी कोई सूचना सरकार के पास नहीं है और न ही वर्तमान पदाधिकारियों की कोई सूची उपलब्ध है। यह भी सूचित किया कि आरएसएस के सालाना आय व्यय, ऑडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट का कोई लेखा जोखा भी सरकार के पास नहीं है।
पानीपत के समालखा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में आरएसएस को एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) बताया था। इसलिए उन्होंने आरटीआई एक्ट के तहत इसके बारे में सूचना मांगी थी। वे इसके माध्यम से आरएसएस के बारे में जानना चाहते हैं। भारत सरकार नीति आयोग के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी दीपक नेलवाल ने 16 सितंबर को आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन 8 (जे) के तहत निजी सूचना होने के कारण आरएसएस के पंजीकरण सर्टिफिकेट की कॉपी सार्वजनिक नहीं करने का जवाब दिया है। इसके साथ आरएसएस के उद्देश्यों व लक्ष्य के बारे भी कोई सूचना भारत सरकार के पास नहीं होने की बात कही है। यही नहीं उन्होंने आरएसएस के वर्तमान पदाधिकारियों की कोई सूची और सालाना आय व्यय, ऑडिट रिपोर्ट व बैलेंस शीट का भी कोई लेखा जोखा भी सरकार के पास नहीं होने की जानकारी दी है।