जहरीली शराब प्रकरण: फाइल-5
बरामद शराब भी शुगर मिल के केमिकल की तरह, जांच के लिए दो सैंपल लिए
पानीपत। शुगर मिल में इस्तेेमाल किए जाने वाले केमिकल लिक्विड फॉर्म में है और दिखने में पारदर्शी हैं। सभी केमिकल फूड ग्रेड के हैं, यानी इनका इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों में किया जाता है। शुगर मिल में इनका इस्तेमाल गन्ने के गाढ़े जूस को पतला करने के लिए, चीनी बनाने के लिए और रंग का इस्तेमाल करने में होता है। मौके पर मिले अफसरों ने बताया कि अगर इनको आम आदमी पी भी ले तो उससे कोई नुकसान नहीं होता। अगर ज्यादा मात्रा में पीता है तो ये नुकसान कर सकता है। दूसरी ओर सोनीपत पुलिस को जो शराब की बोतल बरामद हुई है, बताया जा रहा है कि वह भी पारदर्शी है। इसी आशंका के चलते पुलिस ने इन केमिकल में से दो के सैंपल लिए हैं, जिनको जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
- ये हैं फूड ग्रेड के केमिकल:
नई शुगर मिल में फॉसफोरिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड, कलर प्रेसपिरेंट, विस्कोस्टी रिड्यूसर ज्यादातर इस्तेमाल किए जाते हैं। ये सभी लिक्विड फॉर्म में हैं जो पारदर्शी भी हैं।
सूंघकर भी जांच का किया गया प्रयास
जिस जहरीली शराब या केमिकल से चारों लोगों की मौत हुई है उसकी प्राथमिक जांच के लिए अफसरों ने सोनीपत से बरामद की शराब को सूंघ कर पता लगाने का भी प्रयास किया, जिसमें से उन्हें किसी प्रकार की महक न आने की बात बताई गई। दूसरी ओर ये भी कहा गया कि अगर ये स्प्रिट होता तो इसमें से महक जरूर आती। वहीं, जांच के दायरे में बंटी जिसकी हालत नाजुक है ने बताया कि उनको भी ये कहकर शराब पिलाई गई थी इसमें से कोई महक नहीं आती। अब जांच टीम इस पड़ताल में जुटी हैं कि अगर ये केमिकल नहीं है तो ये कच्ची या जहरीली शराब आई कहां से, किसने इसे बनाया। अभी तक ये माना जा रहा है कि जो लोग अपने घरों में कच्ची शराब तैयार करते हैं तो उनके पास इसकी तीव्रता मापने का कोई पैमाना नहीं होता। इस शराब की तीव्रता कितनी ज्यादा प्रभावी हो सकती है इसका कोई अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। ये पूरी तरह से शुद्ध एल्कोहल का रूप होती हैं।