समालखा। श्री रामलीला ग्राउंड में हो रही रामकथा में रविवार को भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का मार्मिक आयोजन हुआ। मुख्यातिथि सुभाष रमन, नरेश जौरासी, ईश्वर गर्ग, रणधीर व महेश का आयोजकों ने फूलमालाओं से स्वागत करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किए। कथा वाचक आचार्य लखन शांडिल्य ने भावपूर्ण शैली में जब राम बनवास का वर्णन किया तो पंडाल में बैठे हर श्रोता की आंखें नम हो गई। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग त्याग, धर्म, कर्तव्य और आदर्श का अनुपम उदाहरण है। जब राजमाता कैकयी ने दशरथ से अपने दो वरदान जिसमें राम को 14 वर्ष का वनवास व भरत को राज्य मांगा तो उस क्षण अयोध्या नगरी शोक सागर में डूब गई। श्रीराम ने आज्ञाकारी पुत्र का आदर्श प्रस्तुत करते हुए पिता की आज्ञा का पालन किया। राजमहल का सुख छोड़कर वे सहज भाव से वनगमन के लिए तैयार हो गए। मुख्यातिथि सुभाष रमन ने कहा कि रामकथा आत्मा को शुद्ध करती है और समाज को दिशा देती है। ऐसे आयोजन संस्कारों को जीवित रखते हैं। संवाद