पानीपत। जिन पत्थरों से रामभक्त हनुमान की सेना ने रामेश्वरम से लंका पर चढ़ाई करने के लिए सागर पर पुल बनाया था, शहर के रामभक्त उस रामसेतु के अलौकिक पत्थर को तमिलनाडु से लेकर पानीपत पहुंचे हैं। पहले इसे सनातन धर्म मंदिर में रामभक्तों को दर्शन कराने के लिए रखा गया है। उसके बाद इसे मंदिर को ही दान कर दिया गया है ताकि लोग इसकी पूजा अर्चना कर सकें।
करीब पांच हजार साल पुराना यानी त्रेता युग के इस अलौकिक पत्थर को मॉडल टाउन के सनातन धर्म मंदिर के सामने पानी से भरे टब में रखा गया जिसमें ये पत्थर तैरने लगा। यहां लाखों भक्तों ने इस पत्थर के दर्शन किए। इस अलौकिक पत्थर को रामेश्वरम धाम से पानीपत लाने वाले श्री शामा राम सेवा संस्था वृंदावन के जोगिंद्र चुघ और पवन शर्मा ने बताया कि वैसे तो इस पत्थर को लाना प्रतिबंधित है लेकिन वे इसे मांग कर सेवा भाव से लेकर आए हैं। इसके लिए उन्होंने तमिलानडु, रामेश्वरम धाम के जिला प्रशासन से मंजूरी भी ली थी।
इसके बाद इसे ट्रेन के जरिए लाया गया। पहले इसे रामभक्तों को दर्शन कराने के लिए रखा गया है। अब इसे मंदिर को ही दान कर दिया गया है ताकि लोग इसकी पूजा अर्चना कर सके। उन्होंने बताया कि अब तक जिले में ऐसा कोई दूसरा पत्थर नहीं है और हो सकता है प्रदेश में भी किसी के पास ये पत्थर न हो।
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डेढ़ फुट लंबा और करीब दस किलोग्राम वजनी सुनहरा पत्थर
रामसेतु के इस पत्थर का वजन करीब दस किलोग्राम का रहा होगा। वहीं इसकी लंबाई चौड़ाई की बात की जाए तो ये करीब डेढ़ फुट लंबा और करीब डेढ़ फुट ही चौड़ा है। देखने में ये सुनहरे भूरे रंग का है। जो शंखनुमा पत्थर जैसे आकार का दिखायी दे रहा था। पानी में छोड़ते ही इस पत्थर की चमक और बढ़ जाती है। इसकी खास बात ये है कि ये पानी में नहीं डूबता। भगवान श्रीराम की सेना ने इन्हीं पत्थरों से श्रीलंका तक सेतु यानी पुल का निर्माण कर दिया था।
भक्तों ने मस्तक से लगाया:
भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के चलते इस पत्थर को सभी रामभक्तों के दर्शन के लिए पानी से भरे टब में रखा गया है। आने जाने वाले रामभक्तों ने इसे पानी से निकालकर और दोबारा पानी में डालकर भी देखा। पत्थर को रामभक्त कभी मस्तक से लगाते तो कभी इसके सामने हाथ जोड़ते दिखाए दिए। इस चमत्कारी और अद्भुत पत्थर को देख सब मंत्रमुग्ध हो रहे थे। वहीं, रामभक्तों ने रामसेतू के पत्थर के साथ जमकर सेल्फी भी ली।
26 साल से करते हैं सेवा:
संस्था पदाधिकारी जोगिंद्र चुघ, पवन शर्मा, अमित भास्कर, मनोज गुप्ता, मोहित छाबड़ा, मोहित तलूजा ने बताया कि वे पिछले 26 सालों से सेवा का काम करते आ रहे हैं। देश के 26 धामों का भक्तों को भ्रमण करवा चुके हैं। वे जहां भी जाते हैं वहां भागवत कथा भी करवाते हैं। अब तक 26 बार भागवत कथा का पाठ करवा चुके हैं। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने शहर के मंदिराें में लाइटिंग, लंगर और चाय की सेवा दी है।