भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बारे में बताया जाता है कि वह पढ़ाई के लिए नदी पार कर स्कूल जाया करते थे, लेकिन अपने पानीपत के सनौली स्थित रहीमपुर खेड़ी गांव में तो हर बच्चा नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर है। यमुना नदी में टापू पर बसे इस गांव की राज्य बनने के चार दशक बाद भी किसी सरकार ने सुध नहीं ली। यहां न तो स्कूल की सुविधा है और न ही पानी की।
करीब 25 परिवारों की 200 से अधिक आबादी वाला गांव रहीमपुर खेड़ी देश-दुनिया से बिल्कुल कटा हुआ है। गांव में एक भी गली पक्की नहीं है। पीने के पानी के लिए सरकारी हैंडपंप या सबमर्सिबल भी यहां नहीं है। शिक्षा का तो और भी बुरा हाल है। चारों ओर से यमुना से घिरे इस गांव के करीब 40 बच्चों को स्कूल जाने के लिए ट्यूब के सहारे नदी पार करनी पड़ती है।
बारिश के दिनों में जब नदी उफान पर होती है तब गांव का देश-दुनिया से संपर्क टूट जाता है। लोगों के आशियाने भी बह जाते हैं। गांव के लोग अपने वोट से हर बार दूसरे गांवों के लोगों की पंचायत बनवाते हैं। गांव गोयला कलां, मिर्जापुर और रहीमपुर खेड़ी तीनों की एक ही पंचायत है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल या अस्पताल गांव में कोई सुविधा नहीं है। लोगों के आवागमन का साधन ट्यूब है, जिसके सहारे वह नदी पार कर दूसरे गांवों तक जाते हैं। यमुना के टापू क्षेत्र में ही उनकी खेती है।
करीब 900 बीघा जमीन, आज तक गिरदावरी नहीं
रहीमपुर खेड़ी में करीब 900 बीघा जमीन है। ये सारी नदी की तलहटी में है। बरसात के सीजन में नदी के फैलाव से उनकी फसल बर्बाद तो हो जाती है, साथ में उनका भी गांव से संपर्क टूट जाता है। बाढ़ आने से बर्बाद फसलों की गिरदावरी तक नहीं की जाती। अधिकारियों की दलील है कि यमुना नदी के अंदर बांधों के बीच में बाढ़ के पानी से बर्बाद होने वाली फसलों का मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है।
रिंग बांध बने तो बचे गांव
ग्रामीण प्रेम सिंह, सुंदर, नरेश गोस्वामी, राज सिंह आदि ने बताया कि उनका गांव चारों तरफ से मुसीबतों से घिरा हुआ है। सरकार की एक भी सुविधा गांव तक नहीं पहुंची है। गांव को दो साल पहले बिजली मिल सकी है। बारिश के दिनों में तो बिजली भी गुल हो जाती है। रिंग बांध बनने पर ही गांव को बचाया जा सकता है। नहीं तो हर साल आशियाने उजड़ते रहेंगे। गांव को प्रदेश के अन्य गांवों से जोड़ा जाना चाहिए।
रहीमपुर खेड़ी के लोगों का यमुना से आना-जाना काफी खतरों से भरा हुआ है। गांव के लिए रिंग बांध बनाने और लकड़ी का अस्थायी पुल बनवाने पर विचार चल रहा है। अभी ग्राम पंचायत का चार्ज भी नहीं मिला है। चार्ज मिलते ही सबसे पहले इन्हीं कामों को प्रमुखता के साथ करेंगे।
राकेश कुमार, सरपंच, ग्राम पंचायत गोयला कलां।