पानीपत। इंसार बाजार समेत शहर की मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण का मामला कोर्ट पहुंच गया है। एडवोकेट राकेश मान ने दो जनहित याचिका दायर की हैं। कोर्ट ने एक में डीसी, एसपी, निगम आयुक्त, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन, डीटीपी, संयुक्त व्यापार मंडल, संयुक्त व्यापार मंडल समिति के प्रधान और जाटल रोड, गोहाना रोड व रेलवे रोड के दुकानदारों को 66 पेज का समन जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी। वहीं गोहाना रोड श्रीहरि के मामले में स्थानीय आयुक्त नियुक्त किया है। स्थानीय अधिकारियों को मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अतिक्रमण के मामले में समन मिलने पर दुकानदारों और बाजार प्रधानों की धड़कन तेज हाे गई हैं।
एडवोकेट राकेश मान ने कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा कि इंसार बाजार, असंध रोड, गोहाना रोड व रेलवे रोड के बाजार में अतिक्रमण किया गया है। इससे आमजन को निकलने तक का रास्ता नहीं मिल पाता। उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं दुकानदारों के अतिक्रमण करने से नाले ढक गए हैं। इनकी समय पर सफाई तक नहीं होती। ऐसे में बारिश के दिनों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी होती है। नगर निगम बाजार से अतिक्रमण नहीं हटा पा रहा। प्रशासन और पुलिस को व्यापक स्तर पर पुलिसबल मुहैया कराकर इसमें कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसमें कुछ भी नहीं हुआ। कोर्ट ने इस मामले में 21 नवंबर को सुनवाई की है।
अब अगली सुनवाई 19 जनवरी तय की है। कोर्ट ने इस मामले में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, जिला नगर योजनाकार विभाग, लोक निर्माण विभाग की इंफ्रास्ट्रक्चर शाखा और लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को समन जारी किया है। इनके साथ संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष दर्शनलाल वधवा, संयुक्त व्यापार मंडल समिति के प्रधान कृष्ण अग्रवाल को भी समन दिया है। साथ नगर निगम के स्तर पर जाटल रोड, गोहाना रोड व रेलवे रोड के दुकानदारों को नोटिस जारी करेगा। संयुक्त व्यापार मंडल के महासचिव गौरव लिखा ने बताया कि कोर्ट से इस बारे में समन मिला है। मंडल इस मामले में बैठक कर आगामी कदम उठाया जाएगा।
काेर्ट ने स्थानीय आयुक्त लगाया
कोर्ट ने एडवोकेट राकेश मान की गोहाना रोड स्थित श्रीहरि के मामले में स्थानीय आयुक्त लगाया है। कोर्ट के सामने प्रतिवादी पक्ष से कोई भी सुनवाई के लिए पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त प्रतीक्षा हो चुकी है। अब और प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इसमें एक पक्षीय कार्रवाई करने के आदेश दिए। वादी को प्रतिवादियों और वाद की संपत्ति का बेहतर विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए एक आवेदन दायर किया गया है। वादी ने अंतरिम राहत की मांग करते हुए कहा कि प्रतिवादियों का कृत्य उपद्रव के समान है और उन्हें अवैध पार्किंग और अवरोध जारी रखने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी मांगा है। प्रतिवादियों के वकील द्वारा कड़ा विरोध किया गया। जिन्होंने मुकदमे की स्थिरता और अस्पष्ट होने के संबंध में विभिन्न आधारों पर आलोचना की। वादी ने उस क्षेत्र पर कथित अतिक्रमण दिखाने के लिए कुछ तस्वीरों का सहारा लिया है।
कोर्ट ने कहा कि इसके लिए स्थल की निरीक्षण रिपोर्ट आवश्यक है। कोर्ट ने एडवोकेट अर्पित शर्मा स्थानीय आयुक्त नियुक्त किया। उक्त स्थान की वर्तमान स्थिति, सार्वजनिक स्थान के रूप में दावा किए गए स्थान की प्रकृति और अतिक्रमण या अवैध पार्किंग की रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त, लोक निर्माण विभाग या किसी अन्य सरकारी विभाग को घटनास्थल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने में सहायता प्रदान करने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्थानीय आयुक्त को नोटिस जारी कर उनकी सहायता लेने का अधिकार है। स्थानीय आयुक्त की फीस 2500 रुपये वादी द्वारा वहन की जाएगी।