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पुलिस थाने में ही नहीं चौकस, बंदी के फंदा लगाने पर सब दावों की खुली पोल

Wed, 10 Aug 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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पु‌लिस - फोटो : ब्यूरो
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पानीपत। सेवा, सुरक्षा और सहयोग का नारा देने वाली पुलिस अपने ही थाने में चौकस नहीं है। पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की इसी लापरवाही के चलते मारपीट का आरोपी दलित युवक थाने के बंदी गृह में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। वह भी उस वक्त जब पूरा पुलिस थाना जाग रहा था और लगभग सभी कर्मचारी थाने में ही मौजूद थे।
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बंदी को खाना देने व उसको कोर्ट में पेश करने जाने के डेढ़ घंटे बीच किसी ने भी उसको देखा तक नहीं है। पुलिसकर्मियों की इसी लापरवाही के चलते आरोपी बंदी बंदीगृह में कंबल को फाड़कर कतरन से फंदा लगाने में सफल रहा। एसपी ने इन सबके बीच पांच घंटे के बाद ही सबको क्लीन चिट दे दी।

शहर को सुरक्षा देने का दावा ठोंकने वाली थाना शहर पुलिस की पोल मंगलवार दोपहर को उसी के थानेमें खुल गई। मंगलवार दोपहर को पुलिस स्टेशन में हवालात में बंद बंदी प्रदीप (28) निवासी जमालपुर ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। प्रदीप सोमवार शाम से ही हवालात में बंद था।
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प्रदीप के फंदा लगाने की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के साथ सभी छह डीएसपी व सभी जांच एजेंसियों के अधिकारी व कर्मी थाने में पहुंच गए। सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान परिजन कम व पुलिसकर्मी ज्यादा रहे। पुलिस अधिकारियों को परिजनों द्वारा हंगामा करने का डर सता रहा था।

‘साहब मुकदमा दर्ज किया तो मर जाऊंगा’
पुलिस की गिरफ्तारी से परेशान प्रदीप बार-बार पुलिस कर्मियों से मुकदमा दर्ज ना करने की गुहार लगा रहा था। मामले की जांच हवलदार कृष्ण चंद कर रहा था। बताया जा रहा है प्रदीप मुकदमा दर्ज होने के बाद गलानी महसूस कर रहा था। वह शिकायतकर्ता के पैर पकड़ कर माफी मांगने की बात कह रहा था।

प्रदीप ने जांच अधिकारी को कहा था कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया तो वह जी नहीं पाएगा। वह मर जाएगा, लेकिन पुलिस कर्मियों ने प्रदीप की आत्महत्या करने की धमकियों को हल्के में लिया। आत्महत्या करने की धमकी देने के बाद भी पुलिस कर्मियों ने मामले में लापरवाही बरती। मंगलवार दोपहर करीबन साढ़े 12 बजे प्रदीप ने हवालात में गेट पर कंबल से फंदा लगाकर जान दे दी।

प्रदीप को दिल्ली पुलिस में भर्ती करवाना चाहते थे दादा
मृतक प्रदीप के दादा फूलचंद दिल्ली पुलिस में एएसआई रिटायर्ड हैं। दादा फूलचंद ने बताया कि प्रदीप सिर्फ सातवीं तक पढ़ा-लिखा था। प्रदीप तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। प्रदीप के छोटे भाई गुलशन की बीमारी के कारण मौत हो गई थी।

प्रदीप छोटी उम्र में ही नशे का आदी हो गया था। प्रदीप फ्रिज और एसी का अच्छा मैकेनिक भी था। प्रदीप की हरकतों के कारण उन्होंने प्रदीप को घर से बेदखल कर दिया था। प्रदीप घर से बाहर ही रहता था। वह प्रदीप को भी दिल्ली पुलिस में भर्ती करवाना चाहते थे, लेकिन प्रदीप के चाल-चलन के कारण परिवार भी उससे दुखी था।

जांच के दौरान सभी डीएसपी हवालात में फैली बदबू से थे परेशान
जांच के दौरान सिटी पुलिस स्टेशन की हवालात में फैली बदबू से सभी डीएसपी परेशान नजर आए। बदबू किस वस्तु से फैली थी, इसकी जानकारी सिर्फ पुलिस अधिकारियों को ही थी। सभी डीएसपी मामले की जांच के दौरान हवालात से मुंह पर रुमाल रखकर ही बाहर निकल रहे थे।

इन सवालों के चाहिए जवाब
- सिटी थाने में 50 पुलिस कर्मी तैनात थे तो क्या प्रदीप को किसी ने फंदा लगाते नहीं देखा?
- 10 मिनट पहले प्रदीप हवालात से बाहर क्यों घूम रहा था?
- मात्र सवा छह फुट के गेट में फंदा कैसे लगाया जा सकता है?
- हवालात से मात्र दस मीटर दूर अतिरिक्त थाना प्रभारी का दफ्तर और कंप्यूटर रूम है। सभी पुलिस कर्मी कहां थे?
- संतरी की ड्यूटी हवालात के बाहर थी। 11 बजे से साढ़े 12 बजे तक संतरी कहां था?
- पुलिस थाने के अंदर मीडिया की एंट्री पर क्यों रोक लगा दी गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मीडिया अपना काम करने को स्वतंत्र है?

वर्जन :::::::::
प्रदीप मारपीट के एक मामले में आरोपी था और उसको गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर रखा था। पुलिसकर्मी उसको कोर्ट में पेश करने को जा रहे थे। उनको आरोपी प्रदीप फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इस मामले में  धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई है। अब तक मामले में पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा ड्यूटी में लापरवाही बरतने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। मामले की जांच चल रही है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
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राजेश दुग्गल, एसपी, पानीपत।
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