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किसान आंदोलन : पीछे नहीं हटेंगे, तन-मन-धन से करेंगे सहयोग

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pradarsan - फोटो : Panipat
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किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए शनिवार को गांव उग्राखेड़ी में आस-पास के छह गांवों के किसानों की महापंचायत हुई। इसमें गांव कुटानी, उग्रोखड़ी, राजाखेड़ी, निंबरी, रिसालू व नांगल खेड़ी के किसानों ने भाग लिया। महापंचायत में सभी गांव के किसानों, प्रधानों व जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें फैसला लिया गया कि सभी गांव के किसान आंदोलन में अपना पूरा सहयोग करेंगे। रविवार को हर गांव से दस से बीस ट्राली किसानों की भरकर आंदोलन की ओर कूच करेगी। वहां सभी गांव के टैंट लगाए जाएंगे। वहां तब तक रहेंगे जब तक सरकार किसानों की मांग नहीं मान ली जाएगी।
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किसान नेताओं ने कहा कि वे अब तन-मन-धन से आंदोलन को स्पोर्ट करेंगे। उनके साथ आगे चाहे जो भी हो जाए वे अब इसकी परवाह नहीं करेंगे। पीछे हटने का तो सवाल ही नहीं है। अब वे आंदोलन को और मजबूत करेंगे। जितने लोग वहां जाएंगे उतने लोग यहां से वहां जाने की और गए किसानों की वापसी पर आंदोलन की तैयार में काम करेंगे।
इस महापंचायत की अध्यक्षता राजकुमार मलिक ने की जिसमें छह गांवों के प्रधान सेवा सिंह मलिक, रिसालु से सुरेंद्र और कुटानी से सुंदर सिहं, निंबरी से बलिंद्र समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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किसानों को देशद्रोही कह दिया इससे बड़ी शर्म की बात नहीं- बिंटू मलिक
किसान नेता बिंटू मलिक ने कहा कि इससे ज्यादा शर्म की बात कुछ नहीं हो सकती कि जब किसानों को ही देशद्रोही कहा जा रहा है। किसानों को गालियां दी जा रही हैं। जिन पूर्वजों ने देश को आजादी दिलवाई उनकी तरफ पत्थर फैके जा रहे है, हमारे पूर्वजों को देशद्रोही कहा जा रहा है। इससे बड़ा जुल्म नहीं हो सकता। हम कुछ बोले तो दबंग कहते हैं, पत्थर फैंकते हैं। हमारे मन की बसा नहीं रही नहीं तो करना तो हम भी बहुत कुछ करना चाहते हैं।
महापंचायत में बैठक में निर्णय लिया गया है कि बैठक में मौजूद सभी छह गांव से 20 से ज्यादा ट्रैक्टर व ट्राली भरकर किसान दिल्ली कूच के लिए सिंघु बोर्डर जाएंगे और लगभग हर गांव से 200 से ज्यादा किसान ट्राली में बैठकर दिल्ली जाएगा और अपने आंदोलन को ओर मजबूती से कायम रखेगा।
-गांव से शराबी व शरारती तत्व आंदोलन में नहीं जाएगा
निर्णय लिया है कि पहले ही उनको शराबी व शरारती तत्व के नाम से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और हमें भी पता है कि हमारे गांव में शरारती तत्व कौन है तो इसलिए हम पहले ही उस व्यक्ति को आंदोलन में नहीं ले जाएंगे और शराबी को भी ले जाने का काम नहीं किया जाएगा।
किसानों का कहना है कि लाल किले पर बहुत ही शर्मनाक हरकत को अंजाम दिया है जिसकी निंदा हम भी करते है लेकिन ऐसी हरकत हमारे किसान नहीं कर सकते है यह हरकत उपद्रवियों ने की थी जिसकी सजा हमें भुगतनी पड़ी थी और हमें दिल्ली में पुलिस ने बेरहमी से पीट दिया था जिसके बाद हम अपने अपने घर आ गए थे। अब समय आ गया है हम सभी को इकट्ठा होना पड़ेगा।
किसानों का कहना है कि सरकार ने इंटरनेट को बंद करवा दिया गया है ताकि किसानों पर किए अत्याचार के बारे में हम किसान घर बैठे ना देख सके। सरकार की नेट बंद करने के कारण किसानों के साथ साथ आम नागरिक को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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