माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में तैनात कर्मचारी पर खर्चें के नाम पैसे मांगने का आरोप लगाय है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गांव झिंझाना से आया है। आरोप है कि कर्मचारी पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव देने के लिए एक हजार रुपये मांगे। इसकी लिखित शिकायत परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों को दी। इस पर शव गृह में तैनात कर्मचारी को हटा दिया गया है। मामले की विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के झिंझाना गांव के रहने वाले नीरज के मुताबिक उनके पिता विनोद कुमार ने जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया था। इसे उनकी मौत हो गई। उनके शव को जिला नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए शुक्रवार की रात को लाया गया था। शुक्रवार रात को पोस्टमार्टम नहीं हो सका। उन्होंने शनिवार सुबह तक इंतजार किया। उनके पिता के शव को फ्रीजर में भी नहीं रखा गया था।
इससे शव से बदबू आने लगी। शव गृह में पोस्टमार्टम करने वाले सहयोगी कर्मचारी सुरेश कुमार ने कहा कि शव के कफन और पैकिंग के लिए पॉलिथीन वगैरह मंगवाने के नाम पर एक हजार रुपये मांगे। जब उन्होंने पैसे देने की हामी भरी तब ही शव को ले जाने के लिए दिया गया। इसकी शिकायत उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों को दी है।
मृतक विनोद के परिजन ने घनश्याम दास ने बताया कि हम रात को ही शव का पोस्टमार्टम कराने आए थे। शनिवार सुबह का समय दिया गया। यहां कार्यरत सुरेश कुमार ने उनसे एक हजार रुपये मांगे। उन्होंने कहा कि वे पहले ही परेशान हैं। वे परिजन का शव लेने के लिए आए थे, लेकिन यहां भी पैसे मांगे जा रहे हैं।
पहले हो चुकी हैं मौखिक शिकायतें
जानकारों ने बताया कि किसी भी शव का जब पोस्टमार्टम होता है तो कफन लाने का काम पुलिस का होता है। कर्मचारियों की ओर से पहले भी कफन के नाम पर पैसे मांगे जाने की मौखिक शिकायतें मिलती रही हैं। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने कई बार संज्ञान लेकर कर्मचारियों की अदला-बदली तक की है। पहली बार किसी ने लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
मामला संज्ञान में आया है। शामली जिले के नीरज के पिता की जहर का सेवन करने से मौत हुई थी। उनका शव यहां आया था। परिजनों ने लिखित शिकायत दी है कि यहां के कर्मचारी सुरेश कुमार ने उनसे पैसे मांगे हैं। शिकायत के तुंरत बाद जांच कमेटी बना दी गई है। तब तक दोषी कर्मचारी को जांच पूरी होने तक यहां से हटा दिया गया है। - डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला नागरिक अस्पताल।