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पीसीबी प्रदूषण रोकने में फेल, डीसी ने लगाई फटकार

Wed, 09 Nov 2016 01:06 AM IST
ब्यूरो पानीपत
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बैठक लेते डीसी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्मॉग अटैक के बाद एक्शन में आए प्रशासन की पहली ही बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फेल हो गया। विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी स्मॉग के खतरों से बेखौफ नजर आए। जिला स्तर पर आयोजित रिव्यू बैठक में डीसी ने पीसीबी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। सभी को धरातल पर काम करने की हिदायत दी। डीएफएससी को भी जिले में नए ईंट भट्ठे चलाने की परमिशन न देने के निर्देश दिए। इन सबके बीच जिले में पांच से सात प्रतिशत भट्ठों पर ईंटों के पकाने का काम शुरू हो गया है।
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दिवाली के बाद दिल्ली और एनसीआर के जिलों में जबरदस्त स्मॉग रहा। इसके चलते एक साथ मौसम बदल गया। लोगों की आंखों में जलन तक होने लगी। मौसम विशेषज्ञों ने बदले मौसम का कारण दिवाली के दिन अधिक पटाखे और किसानों के पराली जलाने को माना। प्रदेश स्तर पर इस पर बैठक हुई। डीसी को इन सब मामलों के बारे में बैठक लेकर आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए।

जिला स्तर पर रिव्यू बैठक
डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने जिला स्तर पर रिव्यू बैठक ली। डीसी कार्यालय में पर्यावरण प्रदूषण, नगर निगम, डीएफएससी और शिक्षा विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने पर्यावरण प्रदूषण रोकने को लेकर की गई अपनी कार्रवाई के बारे में बताया। डीसी ने पीसी के सब दावों और प्रबंधों पर असंतोष जताया। डीसी ने पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र सिंह को प्रदूषण की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए।
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पराली और कूड़ा जलाने वालों पर दर्ज कराएं केस
उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने पूरे मामले के सामने आने के बाद पराली और कूड़ा कर्कट जलाने वालों पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए। डीसी के एक्शन में आने के बाद अधिकारियों की सांसें फूल गई। उन्होंने कहा कि इतना प्रदूषण होने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले में केवल चार चालान और एक एफआईआर ही दर्ज करवाई गई है। यह मामला बेहद गंभीर है। पिछले साल पराली जलने के धुएं के कारण ही मां-बेटे की मौत हो गई थी। ऐसी दुर्घटनाओं से भी विभाग ने सबक नहीं लिया। डीसी ने सख्त लहजे में कहा कि इसको लेकर विशेष अभियान चलाया जाए। कृषि विभाग के अधिकारियों को भी इसमें साथ लिया जाए।

जिले में नहीं मिलेगा नए ईंट भट्ठे का लाइसेंस
उपायुक्त ने जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक विभाग को भी निर्देश दिए कि कोई भी नया ईंट भट्ठा न चलाया जाए। बैठक में नगर निगम  एसई एनडी वशिष्ठ ने उपायुक्त को बताया कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए विशेष तौर पर निंबरी स्थित कूड़े के ढेरों को मिट्टी से ढका जा रहा है। इसके साथ ही कूड़ा जलाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सीएमओ और डीईओ ने भी रखी अपनी रिपोर्ट
बैठक में सीएमओ और डीईओ ने अपनी-अपनी रिपोर्ट रखी। सिविल सर्जन ने बताया कि फिलहाल हवा चलने के कारण मौसम में बदलाव हुआ है। स्मॉग कम हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी इस बात का समर्थन किया। बताया कि अब मौसम साफ है। इसलिए स्कूलों को बंद करना उचित नहीं होगा।

सड़कों के दोनों तरफ पानी का हो छिड़काव
उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने कहा कि सड़कों के दोनों किनारों पर खुली जमीन या संभावित धूल उड़ने वाले पार्कों में पानी का छिड़काव कराया जाए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का पालना करें। अधिकारी संदिग्ध स्थानों का बार-बार निरीक्षण करें। कृषि भूमि या अन्य खुले स्थानों पर आग लगाने वालों को रोकें। ऐसा करने वालों पर जुर्माना भी लगाएं।     

अमर उजाला माई सिटी रिव्यू
ऑफ द रिकार्ड 102, जबकि विभाग के रिकार्ड में 93 भट्ठे
स्मॉग में सबसे बड़ी भूमिका ईंट भट्ठों की भी होती है। डीएफएससी ने डीसी के सामने अपनी रिपोर्ट पेश की। अमर उजाला माई सिटी ने ईंट भट्ठों को रिव्यू किया तो मामला चिंताजनक मिला। जिले में ऑफ द रिकार्ड 102 ईंट भट्ठे हैं, जबकि विभाग के रिकार्ड में 93 भट्ठे ही हैं। यानी की नौ ईंट भट्ठों के चलने य न चलने का डीएफएससी के पास कोई रिकार्ड नहीं है। विभाग के नियमानुसार ईंट भट्ठों की चिमनी सौ फीट ऊंची नहीं चाहिए। साथ ही ये आबादी और जंगल से करीब एक किलोमीटर दूर होने चाहिए। जिले में कई ईंट भट्ठे इन नियमों को ताक पर रख कर चल रहे हैं। हम बता दें कि ईंट भट्ठों का लाइसेंस जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग देता है। संबंधित व्यक्ति को इससे पहले वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और  डीटीपी से एनओसी लेनी पड़ती है।

सैकड़ों फैक्ट्रियां धुएं में उड़ा रहीं नियम
शहर की सैकड़ों फैक्ट्रियां पर्यावरण प्रदूषण के नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। इन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दूसरे विभागों का कोई ध्यान नहीं है। इनमें सबसे खतरनाक शहर में आबादी के बीच चल रहे डाई हाउस और दूसरी फैक्ट्री हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियों की चिमनी नियमानुसार नहीं हैं।

जिले में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने को लेकर बैठक ली गई थी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिली। संबंधित अधिकारियों को पराली और  कूड़ा फूंकने वालों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। जिला प्रशासन अन्य लोगों पर भी सख्त कार्रवाई करेगा।
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डॉ. चंद्रशेखर खरे, उपायुक्त पानीपत।
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