पानीपत। अब दो साल बाद दोबारा ब्लीच हाउस खुल रहे हैं। जिले के 25 ब्लीच हाउस संचालक ने इन्हें चलाने की अनुमति भी ली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इन्हें एनओसी दी गई है। वहीं दूसरी ओर इनकी आड़ में लगभग 110 ब्लीच हाउस बिना अनुमति के चल रहे हैं। सबसे अधिक ब्लीच हाउस समालखा व इसराना क्षेत्र में चल रहे हैं।
जून 2020 से जनवरी 2021 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन पर कार्रवाई करते हुए ताले जड़े थे। उस वक्त जिले में एक भी ब्लीच हाउस संचालक के पास एनओसी नहीं थी। दो ब्लीच हाउस संचालकों पर सील तोड़कर दोबारा काम शुरू करने पर केस भी दर्ज कराया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब जिस भूमि पर ब्लीच हाउस चल रहे हैं उसका रिकॉर्ड भी तैयार कर रहा है। ब्लीच हाउस संचालक के पास भूजल दोहन की अनुमति भी अनिवार्य की गई है। 2020 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकार्ड में 170 ब्लीच हाउस थे। इनमें से लगभग 135 को सील कर दिया गया था। इन सभी ब्लीच हाउस के बिजली कनेक्शन काटकर ढहा दिया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बार बार पत्र जारी करने के बाद बिजली निगम व जिला योजनाकार विभाग ने इन पर कार्रवाई की थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में ब्लीच हाउसों को स्थापित किया गया है। ब्लीच हाउसों के पास केमिकलयुक्त पानी की निकासी की सुविधा नहीं है। अधिकतर ब्लीच हाउस संचालक इस पानी को भूजल में छोड़ते हैं इससे भूजल खराब होता है वहीं दूसरी ओर ब्लीच हाउस अत्याधिक भूजल का दोहन भी करते हैं।
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अवैध संचालकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई- क्षेत्रीय अधिकारी
2020 में सभी ब्लीच हाउस पर कार्रवाई की गई थी। अब लगभग 25 ब्लीच हाउस संचालक ब्लीच हाउस चलाने की अनुमित ले चुके हैं। जहां अवैध रूप से ब्लीच हाउस चल रहे हैं उन पर कार्रवाई भी की जा रही है।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड