पानीपत। इनेलो जिलाध्यक्ष के भाई जयदीप राठी के अपहरण के बाद से ही पुलिस की अलग-अलग टीमें जांच में जुटी थी। पुलिस की चार टीम, नौ दिन तक चार राज्यों की खाक छानती रही। जैसे-जैसे पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ी तो प्राथमिकी दर्ज की धाराएं भी बदलती रही। पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी, इसके बाद अपहरण की धाराएं बढ़ाई गई। आरोपियों की कॉल और बैंक खाते की डिटेल खंगालने पर भी पुलिस को कुछ सुराग मिले थे जिसमें आरोपियों के बीच लेन-देन की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद से ही पुलिस की जांच का एंगल बदला और यहां तक पहुंची।
जयदीप राठी 27 दिसंबर को घर से निकले थे इसके बाद वह नहीं लौटे। रात को आठ बजे के आसपास उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया था। जिस कारण परिजनों को कुछ अनहोनी होने की आशंका हुई थी। बेटे की शिकायत पर थाना सेक्टर-13-17 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने उनकी तलाश की तो अगले दिन उनकी कार पंजाब के डेराबस्सी में टोल प्लाजा पर मिली थी, जिसमें से उनकी लाइसेंसी पिस्तौल भी गायब मिली थी। परिजनों ने दो माह पहले हुए जमीनी विवाद में चार आरोपियों पर अपहरण करने के आरोप लगाते हुए दोबारा फिर से थाने में शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी में अपहरण की धारा 140 (3) बीएनएस की वृद्धि कर दी और आरोपियों की धरपकड़ ली।
शुक्रवार को पुलिस ने चार आरोपियों हरेंद्र राठी, रविंद्र राठी, सुनील शर्मा और प्रीतम को गिरफ्तार कर लिया। चारों को एक दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। साथ ही बैंक डिटेल भी खंगाली। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण में फिर से धारा बदली और इस बार पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण की धारा 140 (2) बदली, साथ ही कुछ अन्य नाम भी सामने आए। जिनकी पड़ताल के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई, साथ ही कुछ बिंदुओं पर गहनता से छानबीन हुई। रविवार को पुलिस पांचवें आरोपी तक पहुंची तो इस प्रकरण में बड़ा खुलासा हुआ और जयदीप राठी की हत्या होने की बात सामने आई।
सिविल अस्पताल में नेत्र रोग अधिकारी थे जयदीप राठी
परिजनों ने बताया कि जयदीप राठी स्वास्थ्य विभाग में तैनात रहे। वह सिविल अस्पताल में नेत्र रोग अधिकारी के पद पर तैनात थे। उनका एक ही बेटा है और वह एमबीबीएस डॉक्टर हैं। जयदीप राठी ने सनौली रोड पर अपना अस्पताल भी बनाया था। जिसका काम-काज वहीं देखते थे।
आखिरी बार बेटे से हुई थी बात...बोला था घर आ रहा हूं
कुलदीप राठी के परिवार के करीबी रिश्तेदार ने बताया कि 27 दिसंबर को जयदीप राठी ने बेटे प्रतीक से फोन पर बात की थी। शाम को करीब सात बजे उन्होंने बस इतना कहा था कि वह चल दिया और घर लौट रहे हैं। कुछ देर बाद ही उनका मोबाइल फोन बंद हो गया था, जिसके बाद से परिजनों से उनका कोई संपर्क नहीं हुआ है।
ऐसे समझें पूरा घटनाक्रम
-27 दिसंबर को सुबह नौ बजे निकले थे घर से
-रात को आठ बजे के बाद फोन हो गया था बंद,
-28 दिसंबर को परिजनों ने दर्ज कराई थी थाना सेक्टर-13-17 में गुमशुदगी
-29 को परिजनों ने दोबारा फिर शिकायत दी और आरोपियों पर कार्रवाई मांग की
-एक जनवरी को पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की
-दो जनवरी को आरोपियों को अदालत में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया
-तीन जनवरी को आरोपियों को फिर से अदालत में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया
-चार जनवरी को डीएसपी ने घर पर पहुंचकर उनकी हत्या होने की जानकारी पुलिस को दी