पानीपत। टैक्सटाइल नगरी की मुखीजा कॉलोनी-टू में एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। नगर निगम के अंतर्गत आने वाली इस कॉलोनी में आने वाले 110 गज के एक प्लाट पर छह करोड़ 33 लाख रुपये का टैक्स आया है। इस खाली प्लाट पर साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा का विकास शुल्क लगा है। पौने दो करोड़ कूड़ा उठान शुल्क के लगाए गए हैं। इतना ही नहीं इस खाली प्लाट पर 80 लाख रुपये प्राॅपटी टैक्स बनता है और लाखों रुपये फायर टैक्स के अलावा अन्य करों के दिखाए गए हैं।
आज हालात ये हैं कि नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा खाली प्लाट के मालिक और उसके परिवार को भुगतना पड़ रहा है। इसके मालिक का निवास पालिका बाजार में है। समस्या के हल के लिए प्लाट के मालिक नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर के कार्यालय भी पहुंचे। उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई। इस पर निगम के क्षेत्रीय कराधान अधिकारी को तलब किया। निगम अधिकारी ने बताया कि निगम की इस गलती को आपत्ति दर्ज कराकर ठीक कराया जा सकता है। बता दें कि इससे पहले भी वार्ड 18 के लोग नगर निगम में उनकी संपत्तियों पर लगा करोड़ों रुपये के टैक्स की शिकायत लेकर पहुंचे थे। इसमें हर प्लाट पर करोड़ों रुपये का टैक्स दर्शाया था।
टैक्स ठीक कराने के लिए चक्कर पर चक्कर
वार्ड 18 की मुखीजा कॉलोनी-2 से आए लोगों ने बताया कि उनका एक 110 गज का प्लाट है। निगम की प्रॉपर्टी आईडी में ये प्लाट शीतल रानी के नाम से है। रिकॉर्ड में इसकी पुरानी और नई दोनों प्रॉपर्टी आईडी तक हैं और कैटेगरी में प्लाट को खाली दिखाया है। सर्वे में इस पर करोड़ों रुपये का टैक्स दर्शाया गया है, जोकि चौकाने वाला है। इसमें 3.64 करोड़ रुपये का विकास शुल्क है। 80.83 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स है। चार करोड़ 40 लाख का फायर टैक्स है। एक करोड़ 83 करोड़ का कूड़ा कलेक्शन का चार्ज भी है। यह छह करोड़ 33 लाख 89 हजार 899 रुपये बनता है।
जेडटीओ से पूछा कारण
सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि इस संपत्ति पर करोड़ों रुपये के टैक्स और इसके समाधान के लिए निगम के क्षेत्रीय कराधान अधिकारी से बातचीत की। उन्होंने कहा कि ये टैक्स कॉलोनी के कई प्लाटों का इकट्ठा होकर लगा है। ये मामला सब डिवीजन का भी हो सकता है। हालांकि इसे ठीक किया जा सकता है। इसके लिए पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करानी होगी।
जल्द कराएंगे समाधान : भट्ट
सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि समस्या गंभीर है। लोग शिकायत लेकर आए थे। अधिकारियों से पूछा जा रहा है। इस प्रकार की समस्याओं के समाधान का प्रयास भी किया जा रहा है।