पानीपत। एमजेआर एकेडमी के खिलाड़ी कराटे में अपना भविष्य बनाने के साथ जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। खेलों का अच्छा प्रदर्शन करके एकेडमी के खिलाड़ी लगातार पदक जीत रहे हैं। एकेडमी के साथ देश-प्रदेश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। एकेडमी के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीते हैं।
एकेडमी प्रबंधक कंवर रविंद्र सैनी ने बताया कि एकेडमी पिछले कई सालों से बच्चों का पढ़ाई के साथ खेलों में भी भविष्य बना रही है। हाल ही में तालकटोरा स्टेडियम दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में 10 खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं। जिनमें एक स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक शामिल हैं।
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कराटे कोच मुकेश कुमार सरोहा ने बताया कि अभ्यास का समय शाम चार बजे से छह बजे तक होता है। इसमें सभी खिलाड़ी तय समय पर पहुंचकर पूरी लगन के साथ अभ्यास करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले टूर्नामेंट में एकेडमी के खिलाड़ी हर बार हिस्सा लेते हैं और पदक जीतकर प्रदेश का नाम भी रोशन कर रहे हैं।
खिलाड़ी कर रहे मेहनत
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वह 12वीं कक्षा में पढ़ता है। उसके पिता हरीश कुमार बिजनेसमैन और उसकी मां गीता रानी का शहर में बुटिक है। उसको शुरू से ही कराटे पसंददैं। उसने 2019 में देहरादून में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। इसके अलावा भी राष्ट्रीय स्तर पर कई बार कांस्य पदक जीत चुका है। उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है।
चेतन अनेजा, खिलाड़ी
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वह सातवीं कक्षा में पढ़ती है और प्राथमिक कक्षाओं से ही कराटे का प्रशिक्षण ले रही है। राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य और राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है। जिला स्तर पर दो बार पदक जीत चुकी है। उसके पिता प्रवीन खनेजा की स्पेयर पार्ट की दुकान है और मां जीतु खनेजा हैंडलूम बिजनेस वूमन है। वह अब सातवीं कक्षा की छात्रा है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कराटे में देश का नाम रोशन करना चाहती है।
पलाक्षा खनेजा, खिलाड़ी।
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वह कराटे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहता है। इसको लेकर लगातार मेहनत कर रहा है। उसके पिता अंग्रेज सरोहा बिजनेसमैन और मां गृहिणी है। वह कई बार राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुका है। वह प्रतिदिन समय पर एकेडमी पहुंचकर अपना अभ्यास पूरी लगन से करता है।
अंशुल सरोहा, खिलाड़ी
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वह कराटे में अपना भविष्य बना रही है। इसको लेकर लगातार मेहनत कर रही हैं। वह दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य जीत चुकी हैं। इसके अलावा राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है। वह 30 किलोग्राम से कम वजन वर्ग में खेलती हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना चाहती है।
आशी ग्रोवर, खिलाड़ी।
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वह नौवीं कक्षा में पढ़ती है। पढ़ाई के साथ कराटे में अपना भविष्य बनाना चाहती है। वह इसमें राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर पदक जीत चुकी हैं। उसके पिता अनिल वर्मा बिजनेसमैन व मां गृहिणी है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता को लेकर लगातार तैयारी कर रही है। इसके लिए सुबह समय पर एकेडमी पहुंच जाती है।
उर्मिला खिलाड़ी।
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वह सातवीं कक्षा में पढ़ता है। वह कराटे में चार साल से अभ्यास कर रहा है। वह डीएवी स्कूल के गेम्स में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुका है। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है। स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में रजत पदक जीता है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमकाना चाहता है।
योगेश नरवाल, खिलाड़ी
अभिभावक बोले :
उनका बेटा अंशुल सरोहा पढ़ाई के साथ खेलों में आगे आना चाहता है। उनको हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। वह उनको एकेडमी में छोड़ने आने के बहाने उनका खेल भी देखते हैं। बेटे को मैदान पर खेलते देख अच्छा लगता है।
अंग्रेज सरोहा, अभिभावक।
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मेरे पास तीन बेटी हैं। बड़ी बेटी पहले कराटे का अभ्यास करती थी। वह अब विदेश में पढ़ाई कर रही है। अब उर्मिला लगातार अभ्यास कर रही है। उर्मिला बेटी खेलों में आगे आना चाहती थी। मैं और मेरी पत्नी उनको पूरा सहयोग करते हैं।
अनिल वर्मा, अभिभावक
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मेरा बेटा चेतन अनेजा खेलों में आगे आना चाहता था। उनको कराटे ज्यादा पसंद हैं। इसमें हम अपनी आत्मरक्षा भी कर सकते हैं। बेटे को हर सहयोग दिया जाता है। उनको किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाती।
हरीश कुमार,