पानीपत। जिले की झुग्गियों, फैक्ट्ररियों व ईंट भट्ठों पर रहने वाली 50-60 प्रतिशत महिलाओं, बच्चों और किशोरों में खून की कमी है। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए 100 दिन का एनिमिया मुक्त अभियान शुरू करेगा। विशेष रूप से औसतन 30 दिन अभियान चलेगा। यहां एनीमिया के रोगियों को चिह्नित कर उनका इलाज किया जाएगा। जब तक वह ठीक नहीं होते इनको मॉनीटर भी किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले की 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। 20 प्रतिशत गर्भवतियों में तो आठ ग्राम से भी कम खून है। वहीं 55 प्रतिशत बच्चों में भी खून की कमी है। 25 प्रतिशत से अधिक बच्चे गंभीर एनिमिक की श्रेणी में आते हैं। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार 100 दिन का एनीमिया मुक्त अभियान शुरू किया है। सामान्य मरीजों को पहले की तरह प्राथमिक स्तर पर आयरन की दवा दी जाएगी। वहीं अब गंभीर एनीमिया रोगियों को दवाएं देने के साथ जब तक ये ठीक नहीं होते तब इनकी मॉनिटरिंग कर फीडबैक भी लिया जाएगा। मॉनिटरिंग के लिए आशा वर्कर को इस अभियान से जोड़ा गया है। अभियान पानीपत में मंगलवार से शुरू हाे चुका है। अभियान पूरा हाेने के बाद रिपाेर्ट मुख्यालय में साैंपी जाएगी।
सिविल सर्जन डाॅ. जयंत आहूजा ने बताया कि एनीमिया मुक्त अभियान के दौरान झुग्गियों, फैक्टरियों व ईंट भट्ठों पर रहने वालों पर स्वास्थ्य विभाग का फोकस रहेगा। यहां विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है। सामान्य, मध्यम व गंभीर एनीमिया के रोगियों के वर्ग बनाए गए हैं। पानीपत में एनीमिया बड़ी चुनौती है। हर महीने हाेने वाली गर्भवतियाें की जांच में भी 60 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी मिलती है। पानीपत में इससे पहले ये अभियान सात दिनाें के लिए हर तीन महीने के बाद तक चलता था। अब यह अभियान पहली बार 100 दिनाें के लिए चलेगा। जिले की स्वास्थ्य केंद्रों में ये अभियान चलाया जाएगा। स्कूल खुलने के बाद वहां भी जांच कैंप लगाए जा सकते है। विभाग की ओर से अभियान के तहत छह वर्गों में छह लाख से ज्यादा लाेगाें काे जांचा जाएगा।