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Panipat News: सिम बदलकर करे रहे ठगी, साइबर अपराध पुलिस बेबस

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पानीपत। साइबर अपराधी अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं। कंपनी में निवेश कराने और फर्जी अफसर बनकर लोगों की मेहनत की कमाई उड़ा दे रहे हैं। इन सबके बीच साइबर पुलिस लोगों की मदद की जगह खुद बेबस नजर आ रही है। इस वक्त पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती साइबर ठगों को पकड़ने की है। पुलिस अब तक इसमें लगभग असफल साबित रही है। पुलिस ने पिछले डेढ़ साल में साइबर ठगी के महज एक मामले का ही खुलासा किया है। एक जनवरी से अब तक जिले में 34 ठगी की वारदातें हो चुकी है। लोगों से लगभग तीन करोड़ रुपये ठगे जा चुके हैं।
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साइबर ठग पुलिस से एक कदम आगे हैं। किसी भी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होने पर पुलिस ठग के मोबाइल नंबर को ट्रेस करती है लेकिन ट्रेस नहीं कर पाती। साइबर ठग फर्जी सिम से लोगों को झांसे में लेकर शिकार बनाते हैं। ठगी करने के बाद सिम को या तो तोड़ देते हैं या बंद कर देते हैं। साइबर ठग ठगी के बाद अपनी लोकेशन भी बदलते हैं। इसलिए पुलिस के हाथ कुछ खास नहीं लग पाता। एक जनवरी से अब तक जिले में 34 ठगी की वारदातें हो चुकी है। लोगों से लगभग तीन करोड़ रुपये ठगे जा चुके हैं। सबसे अधिक ठगी अब कंपनी में निवेश के नाम पर की जा रही है । इसमें पूर्व अधिकारी, अध्यापक से लेकर उद्योगपति तक ठगे जा चुके हैं। ठग पहले सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शिकार की जानकारी जुटाते हैं। फिर उसको कॉल कर विश्वास में लेकर वारदातों को अंजाम देते हैं। सोमवार को भी शहर में ठगी के दो नए केस सामने आए हैं। बिंझौल गांव के युवक के खाते से 70 हजार रुपये चोरी कर लिए गए। मॉडल टाउन निवासी व्यक्ति के खाते से 40 हजार रुपये चोरी किए गए हैं। दोनों ही मामलों में साइबर अपराध थाना पुलिस ने केस दर्ज किया है।

बॉक्स
इस तरह की जा रही सबसे अधिक ठगी-

- किसी व्यक्ति को कॉल कर ठग पहले खुद को पुलिस अधिकारी बताते हैं। उसके बेटे का नाम पता लगाकर उसको पुलिस की गिरफ्त में होने के नाम पर डराते हैं। उसके बेटे को केस में फंसाने की धमकी देकर ठगी करते हैं। पिछले लगभग पौने दो माह में ऐसे तीन केस आ चुके हैं।
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- किसी युवक व युवती के पास कॉल कर उसको उसके पिता का दोस्त बताते हैं। फिर उसके खाते में पैसे भेजने के नाम पर खाते की जानकारी लेते हैं और खाते से पैसे चोरी कर लेते हैं।

- लोगों को कंपनी में निवेश के नाम पर ललचाते हैं। पहले थोड़े पैसे निवेश करने पर उसको अच्छा लाभ देते हैं। फिर उसको मोटे पैसे निवेश करने के लिए उकसाते हैं। जब वो मोटे पैसे निवेश करता है तो उसको ठग लिया जाता है।

दो साल पहले साइबर अपराध पुलिस थाना-

साइबर अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए दो साल पहले विशेष तौर पर साइबर अपराध पुलिस थाना खोला गया था। इसमें तैनात पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए इन्हें अत्याधुनिक संसाधन भी उपलब्ध कराएं गए लेकिन पुलिस को उम्मीद के अनुसार इसमें सफलता नहीं मिली।

वर्जन-

एसपी अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि मोबाइल पर आने वाले किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। अपने सोशल मीडिया के अकाउंट को प्राइवेट रखें। किसी भी कॉल पर अपने खाते की जानकारी न दें। खुद भी साइबर अपराध के खिलाफ जागरूक हों और दूसरों को भी करें। ठगी होने पर 1930 नंबर पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस समय समय पर शिविर लगाकर लोगों को साइबर अपराध के खिलाफ जागरूक करती है।
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