सिविल अस्पताल 42 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ लेकिन सालों से अत्याधुनिक मशीनों के अभाव से जूझ रहा है। अगर अस्पताल में मशीन हैं तो उनको चलाने के लिए डॉक्टर प्रशिक्षित नहीं है। फेको मशीन डॉक्टरों के प्रशिक्षण के अभाव में कंडम घोषित हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ व पांच बेहोशी के डॉक्टर हैं। ऑपरेशन थियेटर भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, बावजूद इसके जिन मरीजों के हाथ पैर या अन्य स्थानों पर प्लेट, स्क्रू या रॉड डलनी होती है उन्हें खानपुर रेफर करना पड़ता है। कई केस में सी आर्म मशीन न होने से डॉक्टरों को ऑपरेशन वाला पूरा हिस्सा खोलना पड़ता है। इस मशीन से डॉक्टर ऑपरेशन वाली जगह को स्क्रीन पर देख सकते हैं और टूटी हड्डी में रॉड या प्लेट डाल सकते हैं। सिविल अस्पताल के बेहोशी के डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर लोगों से मशीन उपलब्ध कराने में मदद मांगी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि सिविल अस्पताल में बेहतर ऑपरेशन थियेटर है लेकिन सी आर्म मशीन के अभाव में वो लोगों को सेवाएं नहीं दे पा रहे। उन्होंने कई बार मशीन की मांग की है कि लेकिन सरकारी प्रक्रिया बहुत लंबी है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों से मशीन उपलब्ध कराने की अपील की है।
सी आर्म मशीन हड्डी से जुड़े ऑपरेशन के काम में आती है। ये मशीन दस लाख रुपये से शुरू होती है। इस मशीन के जरिए डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या अंदर की जगह को स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिए माइनर से लेकर बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। कौनसा स्क्रू, रॉड, कहां डालनी है ये इस मशीन के आधार पर ही लगाए जाते हैं। इस मशीन के बिना कई ऑपरेशन असंभव होते हैं। इसलिए सी आर्म मशीन बहुत उपयोग होती है।
सी आर्म मशीन टूटी हड्डियों की सर्जरी करने में बहुत उपयोगी है। ये एक एक्स रे की तरह काम करती है। अब कई केस में पूरा हाथ या पैर खोलकर सर्जरी करनी पड़ती है। जिन केस में प्लेट या रॉड डालनी होती है उनमें ये बहुत जरूरी है। कई मरीजों की सर्जरी इसके बिना संभव नहीं होती उनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है।
डॉ. वैभव गुलाटी, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल
मशीन खराब है, उसका ठीक कराने के लिए केस बनाकर भेजा है- सिविल सर्जन
मशीन खराब है। जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला उन्होंने मुख्यालय में मशीन को ठीक कराने का केस बनाकर भेजा हुआ है। जल्द मशीन को ठीक कराएंगे। सेवाएं जल्द शुरू होंगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन