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Panipat News: पानीपत की बेटी आठ माह से सोलन सीडब्ल्यूसी के पास, शोषण की आशंका

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पानीपत। औद्योगिक नगरी की बेटी आठ महीने से हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अपनी कस्टडी में रखा है। उसको चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में रखा जा रहा है। अमेरिका में स्टाफ नर्स मां और पानीपत में रहने वाले मामा ने बच्ची को लाने के लिए कई बार पत्र लिखे।
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आरोप है कि सोलन सीडब्ल्यूसी उनका सहयोग नहीं कर रही। इन आठ महीने में बच्ची को दो बार डॉक्टरी उपचार की जरूरत पड़ी। अब इस मामले में पानीपत सीडब्ल्यूसी ने भी सोलन सीडब्ल्यूसी को पत्र लिखा है। इसके साथ चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट सोलन के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिका में रहने वाली मां ने सीडबल्यूसी पानीपत को लिखे पत्र में कहा कि उसका पहले पति से करीब 14 साल पहले तलाक हो चुका है। उसकी पहले पति से करीब 15 साल की बेटी है। इसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली और वह 2015 में यूएसए चली गई। डॉक्यूमेंट पूरे नहीं होने अपनी बेटी को पानीपत में नानी के पास छोड़ दिया। उसकी मां की 2018 में मौत होने के बाद बच्ची को सोलन के एक (बोर्डिंग) आवासीय स्कूल में प्रवेश दिला दिया। जून 2022 में स्कूल चेयरमैन ने बच्ची के साथ गलत हरकत की। उसकी शिकायत पर चेयरमैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। सीडब्ल्यूसी सोलन ने जून में बच्ची को अपनी कस्टडी में लेकर शेल्टर होम में रख लिया।
कभी दस्तावेज तो कभी मामा का अविवाहित होना दिक्क्त
मां का आरोप है कि वह उसको पानीपत लाने के लिए लगातार मेल कर रही है। सीडब्ल्यूसी सोलन कभी उसके मामा के अविवाहिता होने तो कभी उसके कागज वेरिफाई नहीं होने का हवाला देती हें। इन आठ महीने में बच्ची को दो बार अस्पताल दाखिल कराया गया। एक बार बिल्ली के काटने पर सर्जरी कराने का नाम लिया। फरवरी में उसके दूसरी मंजिल से नीचे कूदकर आत्महत्या की कोशिश की बात कही। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट मांगी तो नहीं दी। मां ने आशंका जताई की उसका शोषण किया जा रहा है। बच्ची का मनोरोग का भी उपचार कराया जा रहा है। उसको सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग भी नहीं दी जाती।
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यह हैं नियम
नियमानुसार किसी भी बच्ची के मिलने पर सीडब्ल्यूसी संबंधित जिला या प्रदेश की सीडब्ल्यूसी को सूचना देती है। उसकी पड़ताल होने के बाद उनके परिजनों या संबंधित सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया जाता है। किसी भी बच्ची की पड़ताल होने के बाद इतने लंबे समय तक अपने पास नहीं रखा जा सकता।

वर्जन
सीडब्ल्यूसी सोलन का 25 फरवरी को एक मेल आया था। इसकी रिपोर्ट उसी समय भेज दी। बच्ची को नहीं भेजा। 25 मार्च को फिर मेल आने पर उसकी 29 मार्च को अपनी रिपोर्ट दी और 31 को फोन किया तो सरकार और नेशनल कमीशन से परमिशन लेने की बात कही। उन्होंने बच्ची को लेने के लिए राष्ट्रीय बाल आयोग को मेल की है। अगर बच्ची नहीं मिलती तो सोमवार को सीडब्ल्यूसी पानीपत सोलन लेने जाएंगी।
डॉ. मुकेश आर्य, सदस्य, सीडब्ल्यूसी, पानीपत।

वर्जन :
बच्ची को चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में रखा है। उसको इन आठ महीने में दो बार चिकित्सक उपचार की जरूरत पड़ी। उसके अभिभावकों के दस्तावेज उनके पास नहीं थे। पानीपत सीडब्ल्यूसी से वेरिफाई करा लिया है। यह मामला हिमाचल सरकार को भेजा गया है। इसकी परमिशन मिलते ही बच्ची को सौंप दिया जाएगा।
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जागृति शर्मा, सीडब्ल्यूसी, सोलन, हिमाचल।
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