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विश्व गुरु बनना है तो एकजुट हो राष्ट्र

Fri, 18 Nov 2016 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
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पानीपत - फोटो : bureau
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने तीन दिवसीय पानीपत प्रवास के दूसरे दिन स्वयं सेवकों को राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने और राष्ट्र को विश्व गुरु बनाने का संदेश दिया।
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मंच पर करीब एक घंटे के संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्र को विश्व गुरु बनाना है तो प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में धर्म का आचरण करना होगा और राष्ट्र को एकजुट होना होगा। उन्होंने इसके लिए पांच मंत्र भी दिए।

शुक्रवार को आर्य गर्ल्स पब्लिक स्कूल में जिले के स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण कार्यक्रम था। इसमें करीब 14 सौ स्वयंसेवकों ने भाग लिया। भागवत सुबह 6:51 बजे कार्यक्रम में पहुंचे।
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स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति में इमोशनल इंटीग्रेशन होना चाहिए। वे करीब 30 साल पहले सह शहरी प्रमुख के रूप में पानीपत आए थे। तब से आज तक पानीपत में कई बदलाव आए हैं।

इस दौरान स्वयंसेवकों का गणवेश भी बदला है और आज हाफ से फुल पेंट में आ गए हैं। संघ में बदलाव आया है और यही सृष्टि का नियम है। हर चीज धर्म के आधार पर होनी चाहिए। इसका अर्थ पूजा से नहीं है।

सरसंघ चालक ने कहा कि राष्ट्र की उन्नति तभी है जब हर व्यक्ति राष्ट्र की एक इकाई के नाते काम करे। इसके लिए परिवर्तन और एकता लाने का काम करना होगा। राष्ट्रहित में जीने व मरने वालों को एकजुट करना होगा।

इसी का नाम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है। सेना, पुलिस और राजनीति की शक्ति अपनी है, लेकिन स्वयं सेवक संघ के पास समाज की शक्ति होती है। भागवत ने कहा कि बिना सरकारी मदद के संघ के 1 लाख 60 हजार समाज सेवा के कार्य चल रहे हैं।

स्वयंसेवकों को जनता के स्नेह का पात्र बनने के प्रयास करने चाहिए। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विभाग के संघ चालक डॉ. गोपाल कृष्ण व पानीपत जिला के संघ चालक अनूप कुमार मंच पर मौजूद रहे।

स्वयंसेवकों को पांच मंत्र
1. सावधान रहें : व्यक्ति को खुद की असावधानी डुबोती है, इसलिए अनुकूल हो या प्रतिकूल हर परिस्थिति में सावधान रहना चाहिए।


2. लक्ष्य के प्रति अनुराग, फिजूल में नहीं: जिस तरह सीता की दी गई मोतियों की माला हनुमान के लिए तुच्छ हो गई, क्योंकि उसमें राम नहीं थे, उसी तरह बहुमूल्य लगने वाली वस्तु भी आपकी साधना के लिए अनुकूल नहीं तो उसका कोई मोल नहीं।


3. कोई भी काम छोटा नहीं होता, जो भी दायित्व मिले उसे लगन के साथ करना चाहिए।


4. कथनी करनी में फर्क न रखें: व्यक्ति को वही बात कहनी चाहिए जो वह कर सकता हो। जो बात कह दी वह करनी भी चाहिए।


5. हर एक की मजबूती से मजबूत होगा राष्ट्र: घोड़े की नाल की कील ढीली होने के कारण एक राजा के युद्ध हारने का उदाहरण देते हुए उन्होंने राष्ट्र और संगठन की मजबूती के लिए प्रत्येक इकाई को मजबूत करने का संदेश दिया।
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