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बिजली निगम लापरवाह, विद्यार्थियों की चिंता नहीं

Mon, 09 Jun 2014 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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लापरवाह बिजली निगम को न मुख्यमंत्री के आदेशों की परवाह है और न ही स्कूली विद्यार्थियों के जीवन की चिंता। इसका उदाहरण कहीं और नहीं, सरकारी स्कूलों में देखा जा सकता है।
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बिजली निगम मुख्यमंत्री की सितंबर 2013 की बैठक में सरकारी स्कूलों से हाईटेंशन तार हटवाने व स्कूलों के कनेक्शन कृषि व उद्योग फीडरों से हटाकर घरेलू फीडर से जोड़ने के आदेशों तक को भी अमल में नहीं ला सका।

शिक्षा अधिकारी कई बार इसके रिमाइंडर डाल चुके हैं, लेकिन निगम अधिकारी इसकी कोई सूचना न मिलने की बात कहकर टाल रहे हैं।

निगम पांच में से एक भी स्कूल की लाइन को घरेलू फीडर से नहीं जोड़ सका और यही हाल स्कूलों की छत से हाईटेंशन तार हटाने में रहा।

निगम नौ में से सिर्फ दो स्कूलों से ही हाईटेंशन की तार हटवा सका है और बाकी सात स्कूलों में आदेशों के एक साल बाद भी सात स्कूलों से हाईटेंशन तार हटवाने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे सका है।
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शिक्षा विभाग द्वारा बार-बार डाले जाने वाले रिमाइंडरों पर बिजली निगम ध्यान दे रहा है और न ही मुख्यमंत्री के आदेशों की पालना कर रहा है।

जून माह में गर्मी रिकार्ड तोड़ पड़ रही है और आगे कई माह तक भी इसका असर जारी रहेगा। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निगम की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

बिजली निगम लापरवाही बरतते एक साल बाद भी जिले के पांच स्कूलों की बिजली सप्लाई को घरेलू फीडरों से नहीं जोड़ सका। इसे लेकर शिक्षा विभाग एक नहीं कई बार रिमाइंडर डाल चुका है, लेकिन निगम को विभाग केे रिमाइंडरों की तरफ भी कोई ध्यान नहीं है।

सीएम की बैठक में हुआ था प्रस्ताव पास
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकारी स्कूलों की छतों से हाईटेंशन की तार व यहां की बिजली घरेलू फीडर से जोड़ने का फैसला लिया था। यह बैठक 17 सितंबर 2013 को हुई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा बिजली निगम को पत्र लिखकर तार हटवाने की मांग की।

सीएम की बैठक में निगम था निशाने पर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह की रविवार को लघु सचिवालय में हुई बैठक में भी बिजली निगम निशाने पर था। मुख्यमंत्री ने निगम के एसई को ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में दी जाने वाली बिजली की रिपोर्ट मांगी थी और जन प्रतिनिधियों से भी इस पर टिप्पणी ली थी। समालखा विधायक के बीच में आने पर निगम अधिकारी बच गए थे, लेकिन गढ़ सरनाई की महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना में बिजली कनेक्शन न देने पर निगम के एसई फंस गए। सीएम ने मीटिंग में एसई को जमकर फटकार लगाई थी और इसकी पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

निगम के हाउस में भी उठा था मुद्दा
स्कूलों और रिहायशी क्षेत्र से बिजली की हाईटेंशन गुजरने का मामला नगर निगम के हाउस की गत सप्ताह हुई मीटिंग में भी उठा था। कई पार्षदों ने बिजली निगम अधिकारियों पर अनदेखी बरतने का आरोप लगाया था। अतिरिक्त उपायुक्त ने बिजली निगम के एक्सईएन को रिपोर्ट देने की कही, लेकिन यहां पर निगम का एक भी अधिकारी नहीं मिला। जिस पर पार्षदों ने नाराजगी जताई और निगम के एक्सईएन व एसडीओ पर उचित कार्रवाई करने की मांग की थी।

ये स्कूल एग्रीकल्चर फीडर से जुड़े
1. राजकीय उच्च विद्यालसय, डिडवाड़ी।
2. राजकीय उच्च विद्यालय, कारद।
3. राजकीय उच्च विद्यालय, अलूपुर नैन।
4. राजकीय सीसे स्कूल, सनौली खुर्द।
5. राजकीय सीसे स्कूल, डाडोला।
इन स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हैं हाईटेंशन तार
1. राजकीय सीसे स्कूल, चंदौली।
2. राजकीय उच्च विद्यालय, डिडवाड़ी।
3. राजकीय उच्च विद्यालय, अलूपुर नैन।
4. राजकीय सीसे स्कूल, शेरा।
5. राजकीय सीरसे स्कूल, नौल्था।
6. राजकीय सीसे स्कूल, नारायणा।
7. राजकीय सीसे स्कूल, सुताना।

निगम केवल दो स्कूलों से तार हटा सका
बिजली निगम मुख्यमंत्री के आदेश और शिक्षा विभाग की मांग पर केवल दो स्कूलों से ही हाईटेंशन तारों को हटवा सका है। इनमें राजकीय उच्च विद्यालय, पावटी व राजकीय उच्च विद्यालय, वीवर्स कालोनी है। बिजली निगम द्वारा यहां से हाईटेंशन तार तो हटवा दी, लेकिन काम पूरा करने के बाद भी शिक्षा विभाग को किसी तरह की सूचना नहीं दी। शिक्षा विभाग को अपने स्तर पर इसका पता लगाना पड़ा।
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