सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम को लेकर डॉक्टरों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। हरिसिंह कॉलोनी निवासी परेशान परिजन दो दिन शव को लेकर सिविल अस्पताल और पीजीआई के चक्कर काटते रहे। परिजनों ने डॉक्टरों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए सीएम विंडो पर शिकायत दी है।
दो दिन पहले हरि सिंह कॉलोनी निवासी हैप्पी (18) की घर पर संदिग्ध हालात में ही मौत हो गई थी। परिजनों के मुताबिक हैप्पी की मौत खून की उल्टी करने के बाद हुई थी, मौत के कारण जानने के लिए ही वो शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर ने उनसे कहा कि सिविल अस्पताल में तो एक साल में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आएगी।
वह आंखों के डॉक्टर हैं, वैसे भी उन्हें पोस्टमार्टम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। परिजनों की डिमांड पर पोस्टमार्टम के लिए दो डॉक्टरों का बोर्ड बनाया गया। बोर्ड में डॉ. आशुतोष और डॉ. प्रीति को शामिल किया गया। आरोप है कि एक डॉक्टर ने ड्यूटी खत्म होने की बात कहकर पोस्टमार्टम से इन्कार कर दिया और आपसी सलाह कर दोनों डॉक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों से मिन्नत करते रहे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वह शव लेकर रोहतक पीजीआई आए। पीजीआई के डॉक्टरों ने भी इन्कार करते हुए दोबारा सिविल अस्पताल भेज दिया।
शुक्रवार को हरि सिंह कॉलोनी निवासी दर्जनों लोग उप सिविल सर्जन डा. नवीन सुनेजा से मिलने पहुंचे। लोगों ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ उप सिविल सर्जन को लिखित में शिकायत दी और कार्रवाई की मांग की। उप सिविल सर्जन ने डॉक्टरों के खिलाफ उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों के एक बोर्ड का गठन किया। डा. दिव्यांशु की अगुवाई में बोर्ड ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया है।
हत्या का शक था इसलिए किया रेफर
बोर्ड में शामिल डा. प्रीति ने कहा कि मामले को संदिग्ध देखते हुए उच्चाधिकारियों के कहने पर ही शव पीजीआई रोहतक भेजा था। पुलिस के एएसआई ने पोस्टमार्टम कागजात पर मृतक को बुखार दर्शाया था। उन्होंने पुलिस से कागजात मांगे तो नहीं दिए। परिजनों ने भी बताया युवक की हत्या का शक है। इसकी सूचना उप सिविल सर्जन को देकर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई रोहतक रेफर किया था। आरोप निराधार हैं।
मामला संदिग्ध होने के कारण डॉक्टरों ने शव को रोहतक पीजीआई भेजा था। वहां से वापस आने के बाद फिर से बोर्ड का गठन कर पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों के आरोपों की जांच की जाएगी। डॉक्टर दोषी पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। - डा. नवीन सुनेजा, डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत